Maharashtra ST Bus Financial Crisis: महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन महामंडल (एसटी) इन दिनों आर्थिक संकट से जूझ रहा है। महामंडल में करीब 86 हजार कर्मचारी हैं और उनके वेतन के लिए हर महीने लगभग 578 करोड़ रुपये की जरूरत होती है। हालांकि, विभिन्न रियायतों की प्रतिपूर्ति के रूप में राज्य सरकार से औसतन 450 से 490 करोड़ रुपये ही मिल रहे हैं। इस आर्थिक अंतर के कारण कर्मचारियों के वेतन में बार-बार देरी हो रही है।
एसटी महामंडल के कर्मचारियों के वेतन और अन्य खर्चों के लिए हर महीने बड़ी राशि की आवश्यकता होती है। कर्मचारी संगठन का कहना है कि सरकार से मिलने वाली रियायत प्रतिपूर्ति जरूरत के मुकाबले कम होने के कारण महामंडल पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इसका सीधा असर कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर पड़ रहा है।
महाराष्ट्र एसटी कर्मचारी कांग्रेस के महासचिव श्रीरंग बरगे के अनुसार, सरकार से हर महीने औसतन 450 से 490 करोड़ रुपये रियायत प्रतिपूर्ति के रूप में मिलते हैं, जबकि वेतन के लिए 578 करोड़ रुपये चाहिए। जून महीने में एसटी को कुल 495 करोड़ 38 लाख रुपये की रियायत प्रतिपूर्ति मिली थी। इसमें महिला यात्रियों को 50 प्रतिशत किराया रियायत के लिए 197 करोड़ 42 लाख रुपये और अमृत वरिष्ठ नागरिक योजना के लिए 141 करोड़ 80 लाख रुपये शामिल थे।
कर्मचारी कांग्रेस ने एसटी की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए महिलाओं को कर्नाटक की तर्ज पर 100 प्रतिशत मुफ्त यात्रा सुविधा देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इससे महिला यात्रियों को राहत मिलेगी और सरकार को इसके बदले एसटी महामंडल को अतिरिक्त प्रतिपूर्ति राशि उपलब्ध करानी होगी।
श्रीरंग बरगे का दावा है कि यदि महाराष्ट्र में भी महिलाओं के लिए पूरी तरह मुफ्त यात्रा की योजना लागू की जाती है, तो एसटी महामंडल को हर महीने करीब 200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्रतिपूर्ति मिल सकती है। इससे महामंडल की आर्थिक स्थिति सुधारने और कर्मचारियों को समय पर वेतन देने में मदद मिल सकती है।
महाराष्ट्र एसटी कर्मचारी कांग्रेस ने राज्य सरकार से रियायतों की प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इससे एसटी महामंडल का आर्थिक बोझ कम होगा और करीब 86 हजार कर्मचारियों को समय पर वेतन मिल सकेगा।
बरगे ने कहा कि रियायत प्रतिपूर्ति में हर महीने अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होने पर भी कर्मचारियों के वेतन की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रियों की संख्या घटने और आय कम होने के कारण महामंडल को सरकार से पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है।
मुंबई: 96 लाख 43 हजार
पुणे: 1 करोड़ 48 लाख 39 हजार
संभाजीनगर: 64 लाख 92 हजार
नासिक: 95 लाख 99 हजार
नागपुर: 61 लाख 32 हजार
अमरावती: 53 लाख 15 हजार
कुल महिला यात्री : 5 करोड़ 20 लाख 20 हजार