Fadnavis Clarification On 36000 Companies Closed: महाराष्ट्र में 36,211 कंपनियां बंद होने को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में चल रही चर्चाओं पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वयं सफाई दी है।
एक ट्वीट के माध्यम उन्होंने कहा कि बंद हुई कंपनियों में से 76% कंपनियां 'डिफंक्ट' थीं, यानी ऐसी कंपनियां जो कभी शुरू ही नहीं हुई थीं।
सांसद शरद पवार को संबोधित एक पत्र में सीएम फडणवीस ने लिखा कि संसद में सांसद राजाभाऊ वाजे के एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने यह जानकारी दी थी। इसके बाद कुछ नए नेताओं और मीडिया ने इसका सुविधाजनक अर्थ निकालकर पोस्ट किया। लेकिन महाराष्ट्र के हित को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट करना जरूरी है।
सीएम ने बताया कि कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के डेटा के अनुसार बंद होने वाली कंपनियों में 76% डिफंक्ट कंपनियां हैं। 12% कंपनियों का अमालगमेशन यानी एकीकरण हुआ है और 2% कंपनियां विसर्जित हुई हैं।
उन्होंने कहा कि 2019-20 में मंत्रालय ने एक विशेष अभियान चलाकर 6 लाख निष्क्रिय कंपनियों को 'स्ट्राइक ऑफ' किया था। इसलिए हर साल बंद होने वाली कंपनियों की संख्या में 'स्ट्राइक ऑफ' की संख्या ज्यादा रहती है। कोविड को छोड़कर हर साल औसतन 20 से 22 हजार कंपनियां बंद होती हैं।
फडणवीस ने आंकड़ों के साथ बताया कि देश में कुल 31 लाख से ज्यादा कंपनियां रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से 21 लाख कंपनियां सक्रिय हैं।
3 जून 2026 के रिकॉर्ड के अनुसार सबसे ज्यादा कंपनियां महाराष्ट्र में 3,96,211 हैं। इसके बाद दिल्ली में 2,72,342 और उत्तर प्रदेश में 1,85,982 कंपनियां हैं। सक्रिय कंपनियों की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। 2015-16 में देश में 6,78,768 सक्रिय कंपनियां थीं, जो अब बढ़कर 21,17,747 हो गई हैं। यानी 10 साल में तिगुने से ज्यादा इजाफा हुआ है।
सीएम फडणवीस ने कहा कि हर साल देश में लगभग 1 लाख नई कंपनियों का रजिस्ट्रेशन होता है। इसमें भी महाराष्ट्र सबसे आगे है। 2025-26 के आंकड़े देखें तो महाराष्ट्र में 41,525 नई कंपनियां बनीं। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 27,494, दिल्ली में 20,272, तेलंगाना में 17,300, कर्नाटक में 17,857, तमिलनाडु में 17,024, गुजरात में 14,666 और पश्चिम बंगाल में 10,598 कंपनियां रजिस्टर्ड हुईं।
सीएम ने कहा, मुझे यह बताते हुए खुशी है कि छत्रपति शिवाजी महाराज का महाराष्ट्र नंबर 1 पर था और नंबर 1 पर ही रहेगा।
चाकण औद्योगिक क्षेत्र में आ रही समस्याओं का भी उन्होंने जिक्र किया। देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि उद्योग मंत्री उदय सामंत को इस मामले में ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। 12 अगस्त को एमआईडीसी की पहल पर जिला प्रशासन, सार्वजनिक निर्माण विभाग, पीएमआरडीए, NHAI और जिला परिषद की बैठक हुई। इसमें समस्याएं सुनकर अल्पकालिक और दीर्घकालिक योजना बनाई गई है। उन्होंने दावा किया कि एक भी उद्योग चाकण से बाहर नहीं जाएगा। महाराष्ट्र उद्योगस्नेही है। इसलिए लगातार विदेशी निवेश राज्य में आ रहा है।
सीएम ने अंत में कहा कि कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की पूरी जानकारी mcacdm.nic.in/data-trends वेबसाइट पर पारदर्शी रूप से उपलब्ध है। इसे कोई भी नागरिक या नेता देख सकते हैं।