Election Commission Internal Rift CEC Gyanesh Kumar: चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में लिए गए कुछ फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की। इनमें मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और मतदाता डेटाबेस से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राऊत ने इस रिपोर्ट के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर गंभीर आरोप लगाए। राऊत ने अमित शाह को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निलंबन तथा कानूनी कार्रवाई की मांग की। ये राऊत के राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि के तौर पर रिपोर्ट में कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया है।
राऊत ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के फैसलों पर राजनीतिक प्रभाव रहा है। इन आरोपों को तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है और इन्हें राऊत के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
NCP (SP) की सांसद सुप्रिया सुले ने चुनाव आयोग के भीतर से सामने आई आपत्तियों को गंभीर विषय बताते हुए केंद्र से तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि मामला नागरिकों के मतदान अधिकारों से जुड़ा है और सभी दलों को साथ लेकर इस पर चर्चा होनी चाहिए।
सुले ने यह भी कहा कि यदि चुनाव आयोग के भीतर काम करने वाले अधिकारी ही प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं, तो इस पर व्यापक चर्चा जरूरी है। उन्होंने CEC से नैतिक जवाबदेही लेने की मांग भी रखी।
इंडियन एक्सप्रेस की जांच के मुताबिक, संधू और जोशी ने कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इनमें से चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज होने की बात रिपोर्ट में कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची से नाम हटाने और चुनावी डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों को अपनी जानकारी या सहमति के बिना लिए जाने पर सवाल उठाया था। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से यह कहा गया है कि SIR से जुड़े फैसले सभी की मंजूरी से लिए गए थे।
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी रिपोर्ट के बाद CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चुनाव व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाते हुए भविष्य में बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई। उनके अन्य बयानों में कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी शामिल है।
फिलहाल चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। रिपोर्ट में सामने आई आपत्तियां और उनके जवाब आने वाले दिनों में इस विवाद का अहम हिस्सा रहेंगे।