

Uddhav Thackeray And Eknath Shinde Acquitted in Vasant Davkhare Defamation Case: महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े एक बेहद पुराने और चर्चित कानूनी विवाद में कल्याण सत्र न्यायालय ने बुधवार को ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। पूर्व विधान परिषद उपसभापति और दिवंगत एनसीपी नेता वसंत डावखरे से जुड़े मानहानि के एक मामले में अदालत ने शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित सभी पांचों आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया है। करीब 17 वर्षों तक चली लंबी अदालती सुनवाई के बाद आया यह फैसला राज्य के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
कल्याण सत्र न्यायालय में प्रथम वर्ग न्यायाधीश संतोष आगे के समक्ष इस संवेदनशील मामले की अंतिम सुनवाई पूरी हुई थी। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। अंततः साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का गहन विश्लेषण करने के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को निर्दोष पाया और उन्हें दोषमुक्त करने का आदेश जारी किया।
करीब 17 वर्षों तक चली लंबी अदालती सुनवाई में 20 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बयान भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज किए गए थे। कल्याण सत्र न्यायालय में न्यायाधीश प्रथम वर्ग संतोष आगे के समक्ष मामले की अंतिम सुनवाई हुई। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। मामले में बचाव पक्ष ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया था।
यह मामला वर्ष 2009 के कल्याण लोकसभा चुनाव से जुड़ा था। उस चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार वसंत डावखरे और शिवसेना के आनंद परांजपे के बीच मुकाबला था। चुनाव प्रचार के दौरान कल्याण पूर्व के पोटे मैदान में शिवसेना की सभा आयोजित की गई थी। सभा में डावखरे की एक निजी बैठक से जुड़ी कथित सीडी दिखाई गई थी।
आरोप था कि इस सीडी में वसंत डावखरे के आपत्तिजनक बयान थे। सीडी के सार्वजनिक किए जाने के बाद डावखरे की कथित मानहानि को लेकर कोलसेवाड़ी पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में तत्कालीन शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, तत्कालीन जिला प्रमुख एकनाथ शिंदे, चुनाव उम्मीदवार आनंद परांजपे और सभा के आयोजक रमाकांत देवलेकर समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था।
वसंत डावखरे मानहानि मामले की जांच के दौरान कथित सीडी को फोरेंसिक जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया था। इसके बाद न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी और आरोपियों के बयान भी दर्ज किए गए। अदालत में इस मामले से जुड़े आरोप-प्रत्यारोप और गवाहों के बयान लंबे समय तक चले।
करीब 17 वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान 20 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज हुए। इसके अलावा उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज किए गए। अदालत में आरोपियों के बयान दर्ज होने के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंची।
बचाव पक्ष ने अदालत में आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए दावा किया था कि मामला राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित था। आरोपों को साबित करने के लिए पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों की गवाही पर भी बचाव पक्ष ने सवाल उठाए।
अंततः कल्याण अदालत ने मामले में उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे और अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। इस फैसले के साथ करीब 17 साल से चल रहे वसंत डावखरे मानहानि प्रकरण की न्यायिक प्रक्रिया समाप्त हो गई है।