Ashok Kharat Money Laundering Extortion Case: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से धन शोधन और जबरन वसूली के आरोप में स्वयंभू धर्मगुरु अशोक खरात उर्फ 'कैप्टन' को गिरफ्तार किया है।
उनकी गिरफ्तारी के बाद संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का जाल सामने आया, जिसके बाद कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने उनके धन के स्रोतों की जांच शुरू की है। एजेंसी के मुताबिक, खरात के पास से कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड भी बरामद हुए है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के अनुसार, खरात कथित तौर पर धार्मिक और आध्यात्मिक प्रथाओं की आड़ में एक सुनियोजित जबरन वसूली रैकेट चला रहा था। जांचकर्ताओं का दावा है कि वह खुद को भगवान शिव का अवतार बताता था और अनुयायियों को, यह विश्वास दिलाता था कि उसके पास अलौकिक शक्तियां और दिव्य ज्ञान है।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि वह फर्जी अनुष्ठानों, काले जादू के दावों और भावनात्मक हेरफेर के जरिए पीड़ितों में भय पैदा करता था। अवतार पूजा और धार्मिक मार्गदर्शन के नाम पर बड़ी रकम खर्च करने के लिए मजबूर किया जाता था। एक शिकायतकर्ता ने अशोक खरात के कहने पर लग्जरी मर्सिडीज कार, विदेश यात्राएं और फार्महाउस संपत्तियों के विकास पर लगभग 5.62 करोड़ रुपये खर्च किया था।
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धन शोधन का तरीका जांच में पता चला कि अपराध से प्राप्त धन को कई बैंक खातों, सहकारी ऋण समितियों, चल-अचल संपत्तियों और अन्य व्यक्तियों के नाम पर बिना उनकी जानकारी के खोले गए प्रॉक्सी खातों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग किया गया था। खरात दो सहकारी ऋण समितियों के जरिए कई बेनामी खाते और सावधि जमा संचालित करता था।