कांजुरमार्ग में तकनीकी खराबी से मध्य रेलवे की लोकल सेवाएं नौ घंटे तक प्रभावित रहीं।
खाली स्टाफ स्पेशल में यात्रियों को चढ़ने से रोकने पर 10 यात्री संगठनों ने डीआरएम से विरोध जताया।
रेलवे ने आपातकालीन व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया, नवंबर में फिर बैठक होगी।
Central Railway Local Trains: मध्य रेलवे पर हर रविवार को मेंटेनेंस के नाम पर घंटों मेगा ब्लॉक लिए जाने के बावजूद लोकल ट्रेनों की लेटलतीफी और अव्यवस्था का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को कांजुरमार्ग के पास आई तकनीकी खराबी के चलते मध्य रेलवे की मुख्य लाइन पर नौ घंटे तक लोकल सेवाएं चरमराई रहीं।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ के बीच रेल कर्मियों के लिए चलाई जाने वाली स्पेशल लोकल लगभग खाली दौड़ी, लेकिन उसके दरवाजे बंद रखकर आम यात्रियों को उसमें चढ़ने से रोक दिया गया।
रेलवे के इस लचर प्रबंधन और संवेदनहीन रवैए के खिलाफ बुधवार को दस यात्री संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक साथ मध्य रेलवे के मुंबई मंडल रेल प्रबंधक हिरीश मीणा से मुलाकात कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। यात्री संगठनों ने डीआरएम को बताया कि सोमवार को कांजुरमार्ग में तकनीकी खराबी के चलते ठाणे शहर, कल्याण, कसारा और कर्जत रूट पर लाखों यात्री घंटों फंसे रहे। प्रशासन के सामान्य स्थिति के दावे के उलट देर रात तक लोकल ट्रेनें 30 से 40 मिनट की देरी से चलीं, जिससे घर लौट रहे लोगों की भारी फजीहत हुई। वहीं स्टेशनों पर बेतहाशा भीड़ के बावजूद रेलकर्मियों की स्पेशल लोकल करीब 75 फीसदी खाली दौड़ी और दरवाजे बंद रखकर परेशान यात्रियों को चढ़ने तक नहीं दिया गया।
संगठनों के कड़े विरोध पर प्रशासन ने लापरवाह कर्मियों पर कार्रवाई और आपात स्थिति में स्टाफ स्पेशल के उपयोग की नई नीति बनाने का आश्वासन दिया है। लोकल ट्रेनों में जानलेवा भीड़ नियंत्रित करने के लिए यात्री संगठनों ने कार्यालयीन समय में बदलाव की मांग
दोहराई संगठनों ने याद दिलाया कि मुंब्रा हादसे के बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी कमेटी की सिफारिशें 12 वर्षों से धूल फांक रही है। संगठनों ने रेलवे से मांग की कि वह राज्य सरकार के साथ लगातार पत्राचार कर इस पर जल्द ठोस निर्णय करवाए।
दैनिक यात्रियों की समस्याओं के समाधान और भविष्य की कार्ययोजना की समीक्षा के लिए नवंबर में दोबारा बैठक बुलाई जाएगी।
मध्य रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक हिरीश मीणा ने यात्री संगठनों के प्रतिनिधियों को यह भरोसा दिया है।
इस आगामी बैठक में यात्रियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा कर ठोस उपाय करने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
बदलापुर, टिटवाला और आसनगांव जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में भारी रिहाइश के बावजूद सार्वजनिक परिवहन के विकल्प नदारद हैं और जनता पूरी तरह लोकल पर निर्भर है।
इसके उलट ठाणे से कल्याण, कसारा और कर्जत के बीच स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं का बुरा हाल है।
सफाई मशीनें बंद पड़ी हैं और शौचालय बदहाल हैं। यात्री संगठनों ने चेतावनी दी है कि व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
आजादी के इतने दशक बीत जाने के बाद भी मुंबई लोकल का कोई सक्षम और सुरक्षित विकल्प खड़ा नहीं किया जा सका है। पीक ऑवर्स में भीड़ का दबाव घटाने के लिए दफ्तरों के समय में बदलाव को लेकर कमेटी तो बना दी गई, लेकिन उसकी सिफारिशों का क्या हुआ, इसका जवाब सरकार को आम जनता को देना चाहिए।लता अरगडे, अध्यक्षा, उपनगरी रेलवे प्रवासी महासंघ
रेल प्रशासन अपनी कमियों का 66 टीकाश राज्य सरकार पर पड़ता है और राज्य सरकार रेलवे की तरफ उंगली उठाती है। इस खींचतान में रोज आम यात्री पिस रहा है। सभी यात्री संगठनों और रेलवे अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक बुलाई जाए और बहानेबाजी छोड़कर यात्रियों की सुरक्षा व समयबद्धता के लिए जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएं।नंदकुमार देशमुख, अध्यक्ष, ठाणे रेलवे प्रवासी संगठन