बॉम्बे हाई कोर्ट (डिजाइन फोटो) 
मुंबई

खुद को बचाओ..हाई कोर्ट ने BMC आयुक्त को लगाई लताड़, कोर्ट स्टाफ को चुनाव ड्यूटी पर बुलाना पड़ा भारी!

Bombay High Court: बॉम्बे हाई कोर्ट ने चुनाव ड्यूटी के लिए कोर्ट स्टाफ को बुलाने पर BMC प्रमुख भूषण गगरानी को फटकारी लगाई। आयुक्त ने स्वीकार की गलती। जानें पूरा मामला।

प्रिया जैस

BMC Commissioner: अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने को लेकर बंबई उच्च न्यायालय द्वारा फटकार लगाए जाने के बाद बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के आयुक्त भूषण गगरानी ने सोमवार को स्वीकार किया कि उन्होंने अदालत के कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी के लिए बुलाकर ‘‘गलती'' की।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने नगर निकाय प्रमुख को स्वयं को ‘‘बचाने'' और अन्य स्रोतों से व्यवस्था करने के लिए कहा। पिछले हफ्ते उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए, अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों को नगर निकाय चुनाव की ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करने का निर्देश देने वाले गगरानी के पत्रों पर रोक लगा दी और उनकी शक्ति एवं अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया।

पीठ ने क्या कहा?

इसके अलावा, इसने जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे बीएमसी आयुक्त को चुनाव ड्यूटी के लिए उच्च न्यायालय या अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों को कोई भी पत्र/संचार जारी करने से भी रोक दिया था। सोमवार को, पीठ ने सवाल उठाया कि नगर निकाय प्रमुख इस तरह के निर्देश कैसे जारी कर सकते हैं। पीठ ने कहा, ‘‘आपको (आयुक्त) किस प्रावधान के तहत शक्तियां प्राप्त हैं? आप उन्हें तलब नहीं कर सकते।आपके पास शक्तियां नहीं हैं।'' गगरानी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रवि कदम ने अदालत से कहा कि आयुक्त द्वारा ऐसे पत्र जारी करना एक गलती है। उन्होंने कहा, ‘‘पत्र वापस ले लिए गए हैं।'' पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘अब खुद को बचाओ''। इसने मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद के लिए स्थगित कर दी।

चुनाव ड्यूटी से छूट देने का अनुरोध

बीएमसी आयुक्त ने 22 दिसंबर, 2025 को शहर की सभी अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों को पत्र जारी कर चुनाव ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करने का निर्देश दिया था। मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट ने आयुक्त और मुंबई शहर के कलेक्टर को सूचित किया कि उच्च न्यायालय ने अधीनस्थ न्यायालयों के कर्मचारियों के संबंध में एक प्रशासनिक निर्णय लिया था। उन्होंने अदालत कर्मियों को चुनाव ड्यूटी से छूट देने का अनुरोध किया।

रजिस्ट्रार (निरीक्षण) द्वारा भी इसी प्रकार का एक पत्र भेजा गया था जिसमें निकाय प्रमुख को उच्च न्यायालय द्वारा पारित प्रशासनिक आदेश के बारे में सूचित किया गया था। इसके बावजूद, आयुक्त ने 29 दिसंबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को एक पत्र जारी कर सूचित किया कि अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों को छूट देने का अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया है।

चुनाव अधिकारी ने की मांग

सोमवार को, आयुक्त के वकील ने कहा कि पिछले सप्ताह के उच्च न्यायालय के आदेश के बाद, आयुक्त ने सभी अधिकारियों को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि अदालत के कर्मचारियों को तलब नहीं किया जा सकता। कदम ने अदालत से कहा, ‘‘हालांकि, इसके बाद भी, एक चुनाव अधिकारी ने शेरिफ कार्यालय को पत्र लिखकर चुनाव ड्यूटी के लिए दो कर्मचारियों की मांग की थी। लेकिन अब उस गलती को भी सुधार लिया गया है।''

उच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह अपने आदेश में कहा कि सितंबर 2008 में, उच्च न्यायालय की प्रशासनिक न्यायाधीश समिति ने यह निर्णय लिया था कि उच्च न्यायालय और सभी अधीनस्थ न्यायालयों के कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से छूट दी जाएगी।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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