Bombay HC Clears Swadeshi Mills Revival: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई की प्रतिष्ठित स्वदेशी मिल्स कंपनी लिमिटेड के पुनरुद्धार का रास्ता साफ कर दिया है। न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने 2 सितंबर को 2005 में जारी कंपनी के परिसमापन यानी वाइंडिंग-अप आदेश पर स्थायी रोक लगा दी।
साथ ही एकल पीठ के उस फैसले को भी खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी के पुनरुद्धार पर रोक लगाने से इनकार किया गया था। इस फैसले के बाद बहुसंख्यक शेयरधारकों ग्रैंड व्यू एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड और फोर्ब्स एंड कंपनी लिमिटेड तथा राष्ट्रीय मिल मजदूर संघ (RMMS) के समर्थन वाली पुनरुद्धार योजना आगे बढ़ सकेगी।
अदालत ने योजना को जनहित में बताते हुए कहा कि इससे दो दशक से अधिक समय से नुकसान और कठिनाइयों का सामना कर रहे हजारों पूर्व कामगारों को लाभ मिलेगा। श्रमिक संघ के साथ हुए समझौते के अनुसार करीब 2,834 पूर्व कर्मचारियों को लगभग 223 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान किया जाना है।
यह राशि सामान्य परिसमापन प्रक्रिया के तहत मिलने वाले अनुमानित 74 करोड़ रुपये से काफी अधिक है। योजना में बदली कामगारों, तकनीकी कर्मचारियों और मृत कर्मचारियों के परिवारों को भी शामिल किया गया है।
मिल की जमीन पर रहने वाले करीब 800 परिवारों को मुफ्त आवास मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा अन्य पात्र लोगों को रियायती आवास योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में कामगारों के हितों को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।
अदालत के अनुसार, दो दशक से अधिक समय तक कामगारों ने जिस नुकसान और पीड़ा को झेला है, उसे नजरअंदाज करना संवेदनहीन होगा। खंडपीठ ने श्रमिक संघ, RMMS और अपीलकर्ताओं के बीच हुए समझौते को भी महत्वपूर्ण माना।
दो अल्पसंख्यक शेयरधारकों ने पुनरुद्धार योजना का विरोध करते हुए मिल की जमीन को सार्वजनिक नीलामी के जरिए बेचने की मांग की थी। दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी महज 0.07321 प्रतिशत है। उनका कहना था कि पहले भी 2022 में पुनरुद्धार का प्रस्ताव खारिज किया जा चुका है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि अगर जमीन नीलामी में 3,000 करोड़ रुपये में भी बिकती है, तो उनकी हिस्सेदारी का मूल्य करीब 2.19 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होगा।
स्वदेशी मिल्स कंपनी की स्थापना 13 सितंबर 1886 को हुई थी। 5 फरवरी 2001 को BIFR ने कंपनी की खराब वित्तीय स्थिति के कारण उसे बंद करने की सिफारिश की। 5 सितंबर 2005 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने औपचारिक परिसमापन का आदेश दिया। 14 मई 2024 को कंपनी ने अपने उद्देश्य में रियल एस्टेट विकास को शामिल किया।
31 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कामगारों और लेनदारों के बकाये के समझौते की दोबारा जांच के निर्देश दिए। 23 फरवरी 2026 को एकल पीठ ने पुनरुद्धार प्रस्ताव खारिज किया। अब 2 सितंबर 2026 को खंडपीठ ने उस फैसले को पलटते हुए परिसमापन पर स्थायी रोक लगा दी और पुनरुद्धार का रास्ता साफ कर दिया।