

Police Questioning Is Not An Arrest: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति को पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन के लिए बुलाए जाने के बाद कुछ घंटों तक वहां इंतजार कराने को गिरफ्तारी नहीं माना जा सकता है। पुलिस स्टेशन में व्यक्ति पुलिस की निगरानी में था महज इसे अरेस्ट नहीं माना जा सकता।
यदि पुलिस के पास तत्काल गिरफ्तारी नहीं करने का उचित कारण है और आरोपी को पूछताछ के बाद ही गिरफ्तार किया गया है, तो 24 घंटे का समय अरेस्ट के बाद शुरू होगा न कि पूछताछ के लिए बुलाए गए वक्त से गिरफ्तारी से पहले जांच करना पुलिस का अधिकार है।
एक व्यक्ति ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उसे रद्द करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का दावा था कि मुंबई पुलिस ने उसे पूछताछ के नाम पर थाने बुलाने के बाद काफी समय तक अपने पास रखा और बाद में गिरफ्तार किया, इसलिए गिरफ्तारी की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं थी।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और पुलिस की कार्रवाई की जांच की। न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और आर. एस. भोंसले की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केवल पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन बुलाया जाना या वहां कुछ समय तक रहना गिरफ्तारी नहीं माना जा सकता। अदालत ने पुलिस की कार्रवाई को वैध मानते हुए व्यक्ति की दलील को स्वीकार नहीं किया।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि पुलिस स्टेशन में पूछताछ के लिए बुलाए जाने और गिरफ्तारी के बीच का अंतर महत्वपूर्ण है। जस्टिस सारंग कोतवाल और आर. एस. भोंसले की पीठ ने फैसले में कहा कि संबंधित व्यक्ति मनोहर पठारे को सुबह करीब 11 बजे पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन बुलाया गया था।
हालांकि, पुलिस स्टेशन पहुंचते ही उसे गिरफ्तार नहीं किया गया था। अदालत के अनुसार, पुलिस ने पहले उससे पूछताछ और आवश्यक जांच की तथा बाद में उसे गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद निर्धारित 24 घंटे की अवधि के भीतर ही मनोहर पठारे को अदालत के समक्ष पेश किया गया।
पीठ ने इस आधार पर गिरफ्तारी को अवैध मानने से इनकार कर दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन में मौजूद रहने का समय अपने आप गिरफ्तारी की अवधि में नहीं जोड़ा जा सकता।