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BMC इंजीनियरों के तबादलों पर फिर उठे सवाल, BJP विधायक मिहिर कोटेचा ने लगाया कैश फॉर ट्रांसफर का आरोप

Mumbai BMC News: बीजेपी विधायक मिहिर कोटेचा ने BMC में इंजीनियरों के तबादलों में 'कैश फॉर ट्रांसफर' का आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग की।

रूपम सिंह

Mumbai BMC Engineer Transfer Controversy: बीएमसी में इंजीनियरों के तबादलों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीजेपी विधायक मिहिर कोटेचा ने आरोप लगाया है कि इंजीनियरों के तबादलों में कथित तौर पर 'कैश फॉर ट्रांसफर' का खेल दोबारा हुआ है। उन्होंने इस मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग करते हुए राज्य के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल को पत्र लिखा है।

जानकारी देने में कथित देरी को लेकर बीएमसी अतिरिक्त आयुक्त (पूर्वी उपनगर) अविनाश ढाकणे के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। कोटेचा के मुताबिक, बीएमसी में इंजीनियरों के तबादलों को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है।

वर्ष 2025 में तत्कालीन मनपा अतिरिक्त आयुक्त ने 165 इंजीनियरों के तबादले किए थे। इसके बाद बीजेपी विधायक अमित साटम ने लिखित शिकायत कर इन तबादलों में कथित 'कैश फॉर ट्रांसफर' का आरोप लगाया था। बाद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आदेश पर यह तबादला सूची रद्द कर दी गई थी। कोटेचा ने पत्र में बताया कि 15 मई 2026 को उन्होंने मनपा आयुक्त अश्विनी भिड़े को पत्र लिखकर एक नई तबादला सूची तैयार किए जाने की जानकारी दी थी।

उनका दावा है कि इस सूची में पहले की 165 तबादलों वाली प्रस्तावित सूची के करीब 50 प्रतिशत इंजीनियर शामिल थे। कोटेचा के अनुसार, यह प्रस्ताव मनपा अतिरिक्त आयुक्त अविनाश ढाकणे के मार्गदर्शन में तैयार किया गया था। उनके पत्र के बाद मनपा आयुक्त ने प्रस्तावित तबादला सूची रद्द कर दी।

'रेट कार्ड' की जानकारी होने का किया दावा

कोटेचा ने दावा किया है कि करीब दो-तीन महीने पहले हुए इंजीनियरों के तबादलों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की जानकारी उनके पास है। उन्होंने कहा कि कथित अनियमितताओं से जुड़ी जानकारी में एक 'रेट कार्ड' भी शामिल है। कोटेचा ने बताया कि इन आरोपों की सच्चाई जांचने के लिए उन्होंने 5 अगस्त 2026 को मनपा अतिरिक्त आयुक्त अविनाश ढाकणे से कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब और संबंधित दस्तावेज मांगे थे। लेकिन करीब 26

दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें जानकारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि मांगी गई जानकारी मिलने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इंजीनियरों के तबादलों में दोबारा किसी तरह का कैश फॉर ट्रांसफर' हुआ था या नहीं। जानकारी देने में हो रही देरी ने उनके संदेह को और बढ़ा दिया है। कोटेचा ने मुख्य सचिव से पूरे मामले की विस्तृत जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

पहले भी हो चुका है विवाद

अक्टूबर 2025 में बीएमसी के 160 से अधिक इंजीनियरों के तबादलों को लेकर विवाद सामने आया था। मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम और आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने आरोप लगाया था कि इंजीनियरों की मनचाही पोस्टिंग और तबादलों के लिए 5 लाख से 40 लाख तक की कथित वसूली की जा रही है। आरोपों में तत्कालीन चीएमसी अतिरिक्त आयुक्त अमित सैनी का नाम भी सामने आया था। आरोपों के बाद तत्कालीन बीएमसी आयुक्त भूषण गगरानी ने 160 से अधिक इंजीनियरों के तबादलों पर रोक लगा दी और कहा कि नियमों के अनुरूप पाए जाने वाले तबादलों को ही आगे मंजूरी दी जाएगी।

सैनी ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि तबादले निर्धारित प्रक्रिया और मेरिट के आधार पर किए गए थे। विवाद के बीच दिसंबर 2025 में राज्य सरकार ने अतिरिक्त आयुक्त अमित सैनी का तबादला कर दिया और उनकी जगह अविनाश ढाकणे को नियुक्त किया गया। साटम ने केवल तबादला करने के बजाय पूरे मामले की विभागीय जांच और एंटी करप्शन ब्यूरो से जांच की मांग की थी।

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