Mumbai Municipal Corporation: मुंबई महानगरपालिका (BMC) सभागृह ने नगरसेवकों के वार्षिक निधि में बड़ी बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब नगरसेवकों को अपने वार्ड में विकास और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कामों के लिए सालाना 1 करोड़ रुपये का निधि मिलेगा। इससे पहले यह राशि 60 लाख रुपये थी। करीब 12 साल बाद नगरसेवकों के निधि में बढ़ोतरी की गई है।
नगरसेवकों के निधि में बढ़ोतरी का प्रस्ताव लागू होने के लिए मुंबई महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे की सकारात्मक राय जरूरी होगी। यदि आयुक्त की मंजूरी नहीं मिलती है तो प्रस्ताव को राज्य सरकार के नगर विकास विभाग के पास भेजा जाएगा।
नगरसेवकों को मिलने वाले निधि का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर नागरिक सुविधाओं से जुड़े विभिन्न कार्यों में किया जाता है। इसमें वार्ड की सड़कों की मरम्मत, इमारतों की पाइपलाइन बदलना, सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण, उद्यानों का सौंदर्यीकरण और उनके रखरखाव जैसे कार्य शामिल हैं।
निधि बढ़ने से नगरसेवकों को अपने-अपने वार्ड में छोटे लेकिन जरूरी विकास कार्यों को गति देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मुंबई बीएमसी सभागृह की बैठक में विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा के लिए उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया।
विपक्ष के मुताबिक, सुधार समिति के 15 प्रस्तावों के अलावा करीब 20 हजार करोड़ रुपये से जुड़े 10 प्रस्तावों को भी चर्चा के पर्याप्त अवसर के बिना मंजूरी दी गई। इसके विरोध में विपक्ष ने सभात्याग किया।
सभागृह में सेवनहिल्स अस्पताल के निजीकरण से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इसके अलावा मुलुंड डंपिंग ग्राउंड की करीब 15 एकड़ जमीन धारावी पुनर्विकास परियोजना के लिए पांच साल की लीज पर देने का प्रस्ताव भी शामिल था।
मुलुंड खेल परिसर के आरक्षण में बदलाव कर वहां पेट्रोल पंप के लिए जगह उपलब्ध कराने और अंधेरी के आंबिवली में 1,840 वर्ग मीटर के उद्यान का आरक्षण रद्द कर आवासीय उपयोग की अनुमति देने से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली।
लोअर परेल स्थित सेंच्युरी मिल की BMC के स्वामित्व वाली 6.17 एकड़ जमीन को 30 साल के लिए निजी डेवलपर को लीज पर देने के प्रस्ताव को भी सभागृह ने मंजूरी दे दी।
इस फैसले को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने BMC आयुक्त अश्विनी भिडे को पत्र लिखकर सभागृह में मंजूर किए गए प्रस्तावों के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग की है।
अब नगरसेवक निधि बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर आयुक्त की राय और विवादित प्रस्तावों के क्रियान्वयन को लेकर आगे क्या निर्णय होता है, इस पर नजर रहेगी।