शरद पवार और प्रकाश अंबेडकर (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
मुंबई

पवार और आंबेडकर को मुंबईकरों ने नकारा, 'आप' का भी सूपड़ा साफ, बीएमसी में नहीं खुला खाता

BMC Election Results: बीएमसी चुनाव 2026 में शरद पवार, प्रकाश आंबेडकर और 'आप' का सूपड़ा साफ। 65 सीटों पर निर्विरोध चुनाव जीतकर भाजपा-शिंदे गठबंधन ने बनाया रिकॉर्ड।

प्रिया जैस

Maharashtra Municipal Election Result: बीएमसी चुनाव में राकां शरद पवार गुट और प्रकाश आंबेडकर की वंचित आघाडी का खाता भी नहीं खुल सका। इस चुनाव में पवार गुट ने उद्धव व राज ठाकरे की पार्टी के साथ गठबंधन किया था। मुंबई में पवार गुट ने 11 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे लेकिन कोई भी चुनाव जीतने में सफल नहीं रहा।

आंबेडकर की वंचित ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने का फैसला किया था। इसके तहत 62 सीटें वंचित को मिली थीं लेकिन वह सिर्फ 46 सीटों पर ही उम्मीदवार खड़ा कर सकी। बाकी सीटें कांग्रेस को वापस कर दी गईं। इस वजह से करीब 12 सीटों पर कांग्रेस अपना उम्मीदवार भी खड़ा नहीं कर सकी। शुक्रवार को आए चुनाव परिणाम के मुताबिक वंचित का भी खाता नहीं खुल सका।

10 मनपाओं में 65 उम्मीदवार निर्विरोध

चुनावों से पहले 10 नगर निकायों के कुल 65 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। इनमें भाजपा 43 सीटों के साथ शीर्ष पर है। 18 उम्मीदवारों के साथ शिंदे नीत शिवसेना दूसरे स्थान पर है जबकि राका के 2 प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए, कल्याण-डोम्बिवली से 20 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए, जिनमें भाजपा के 16 और शिवसेना के 6 उम्मीदवार हैं।

पिंपरी-चिंचवड़ और पुणे में भाजपा के 2-2 और भिवंडी-निजामपुर में 6 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए। पनवेल में 7 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जिनमें भाजपा के 6 और एक निर्दलीय शामिल है। जलगांव में 12 उम्मीदवार बिना चुनाव लड़े ही निर्वाचित हुए, जिनमें शिवसेना और भाजपा के 6-6 उम्मीदवार शामिल हैं। धुलिया में निर्विरोध चुने गए चारों उम्मीदवार भाजपा से है। ठाणे शहर में सभी 6 पार्षद शिवसेना के हैं। अहिल्यानगर में भाजपा के 3 और राकां के 2 प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए।

75 सीटों पर खड़ी थी 'आप'

अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने बीएमसी चुनाव में 75 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। पार्टी का भी कोई भी उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल नहीं रहा है।

आठवले गुट भी निराश

महायुति में शामिल रामदास आठवले की आरपीआई को भी निराशा का सामना करना पड़ा। आठवले ने शुरू में आरोप लगाया था कि सीटों के बंटवारे में उनके साथ विश्वासघात हुआ है। हालांकि बाद में उन्हें कुछ सीटें दी गई लेकिन आरपीआई के उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाए।

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