बालासाहेब ठाकरे और सचिन तेंदुलकर (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
मुंबई

'तूने जो कमाया है उसे गंवा मत देना', सचिन तेंदुलकर ने ऐसा क्या कहा कि बालासाहेब को देनी पड़ गई थी चेतावनी

Balasaheb Thackeray to Sachin Tendulkar: जब बालासाहेब ठाकरे ने सचिन तेंदुलकर को दी थी नसीहत- 'राजनीति की पिच पर बल्लेबाजी मत करो'। पढ़ें मुंबई और मराठी अस्मिता से जुड़ा यह चर्चित किस्सा।

प्रिया जैस

Balasaheb Thackeray: महाराष्ट्र की राजनीति में बालासाहेब ठाकरे का कद ऐसा था कि बिना चुनाव लड़े और बिना किसी संवैधानिक पद पर रहे, वे दशकों तक सत्ता और समाज की दिशा तय करते रहे। उनकी जयंती के अवसर पर उनसे जुड़ा एक चर्चित किस्सा आज भी राजनीतिक और सामाजिक बहसों में याद किया जाता है, जब उन्होंने क्रिकेट के महानायक सचिन तेंदुलकर को सार्वजनिक रूप से नसीहत दी थी।

मामला तब का है, जब सचिन तेंदुलकर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि वह पहले भारतीय हैं और फिर महाराष्ट्रीयन। उनसे पूछा गया था कि क्या मुंबई सिर्फ मराठियों की है? इस पर सचिन ने जवाब दिया था कि मुंबई सभी भारतीयों की है। यह बयान बालासाहेब ठाकरे को नागवार गुजरा। उनके अनुसार, मराठी अस्मिता और मुंबई के सवाल पर इस तरह की टिप्पणी मराठी जनभावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली थी।

सामना में लिखा खुला पत्र

बालासाहेब ठाकरे ने इस पर सीधे प्रतिक्रिया दी और शिवसेना के मुखपत्र सामना में सचिन के नाम एक खुला पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने तीखे शब्दों में लिखा कि सचिन को क्रिकेट तक ही सीमित रहना चाहिए और राजनीति की पिच पर बल्लेबाजी करने से बचना चाहिए। ठाकरे ने लिखा, “क्रिकेट की पिच पर तूने जो कमाया है, उसे राजनीति की पिच पर गंवाने की कोशिश मत कर। यह सलाह तेरे भले के लिए है।”

उन्होंने आगे लिखा कि सचिन के चौकों-छक्कों पर देश तालियां बजाता है, लेकिन अगर मराठी जनता के अधिकारों के मुद्दे पर उनकी बात मराठियों को चोट पहुंचाएगी, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ठाकरे ने इस पत्र में समकालीन क्रिकेटरों पर भी तंज कसते हुए लिखा कि खिलाड़ी देश के लिए खेलते हैं या सिर्फ अपने फायदे के लिए यह सवाल भी जरूरी है।

बालासाहेब ने दिया साफ संदेश

पत्र का लहजा सख्त था और संदेश साफ कि लोकप्रियता जिम्मेदारी के साथ आती है। यह घटनाक्रम बालासाहेब ठाकरे की उस छवि को रेखांकित करता है, जिसमें वे मराठी अस्मिता के सवाल पर किसी भी बड़े नाम से टकराने से नहीं हिचकते थे।

गौरतलब है कि 17 नवंबर 2012 को 86 वर्ष की उम्र में बालासाहेब ठाकरे का निधन हुआ, लेकिन ऐसे किस्से आज भी उनके बेबाक और आक्रामक राजनीतिक व्यक्तित्व की याद दिलाते हैं।

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