मीरा भायंदर फॉरेस्ट एन्क्रोचमेंट इशू (सौ. सोशल मीडिया ) 
महाराष्ट्र

Mira Bhayander के जंगलों में अवैध गतिविधियां तेज, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

Mira Bhayander के जंगलों में अतिक्रमण, अवैध निर्माण और वन्यजीवों के शिकार की आशंका बढ़ रही है। प्रशासन की लापरवाही से हालात गंभीर हो गए हैं, जिससे पर्यावरण और सुरक्षा दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।

अपूर्वा नायक

Mira Bhayander Forest Encroachment: संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से सटे येऊर और घोड़बंदर के वन क्षेत्रो में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अतिक्रमण, अवैध गतिविधियों और वन्यजीवों के लिए बढ़ते खतरे के बीच प्रशासन की उदासीनता ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की ओर से बार-बार शिकायतें किए जाने के बावजूद वन विभाग की निर्षक्रयता सवालों के घेरे में है। जंगल में बढ़ रही घुसपैठ, वन्यजीवो पर खतरा: स्थानीय स्तर पर सामने आ रही घटनाओं के मुताबिक, जंगल मे लगातार बाहरी लोगों की आवाजाही बढ्द रही है।

कई जगहों पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण की गतिविधियां देखी जा रही हैं। इतना ही नहीं, तेंदुओं के शिकार और उनके अवैध व्यापार की आशंका भी जताई गई है, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

Mira Bhayander में पेड़ों की कटाई और 'चॉल माफिया' का बढ़ता दबदबा

सूत्रों के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में चॉल माफिया द्वारा बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जा रही है। जंगल की जमीन पर कब्जा कर अवैध बस्तियां बसाने की कोशिशें भी जारी हैं। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि भविष्य में बड़े पारिस्थितिक संकट की आशंका भी बढ़ रही है।

Mira Bhayander खदान में मगरमच्छ मिलने से मचा था हड़कंप

  • मीरा रोड के मंडोवी पाड़ा स्थित एक निजी खदान में मगरमच्छ पाए जाने की खबर ने सभी को चौंका दिया था।
  • विशेषज्ञों के अनुसार, इस इलाके में मगरमच्छ का पाया जाना असामान्य और संदिग्ध है।
  • मनसे पदाधिकारी सचिन जांभाले के अनुसार, उन्होंने इस मामले में कई अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते हुए किसी ने भी ठोस कदम नहीं उठाया।
  • इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
  • क्या वन्यजीवों की सुरक्षा महज कागजों तक सीमित है? कई स्थानों पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण की गतिविधियां देखी जा रही हैं। प्रशासन की उदासीनता मामले को गंभीर बना दिया है।

बंद पड़ी वन चौकियां, पेट्रोलिंग नदारद

  • संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से सटे माशाचा पाड़ा जैसे संवेदनशील इलाकों में वन चौकियों का अधिकांश समय बंद रहना गंभीर चिंता का विषय है।
  • स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां पेट्रोलिंग नाम मात्र की होती है, जिससे असामाजिक तत्वों को जंगल में प्रवेश का खुला मौका मिल रहा है। रात के समय संदिग्ध गतिविधियों की भी खबरें सामने आई हैं।

सुसाइड और संदिग्ध घटनाएं बढ़ीं

कुछ महीने पहले इसी क्षेत्र में एक व्यक्ति द्वारा जंगल में आत्महत्या किए जाने की घटना सामने आई थी। उस समय भी वन चौकी पर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। इस तरह की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती हैं।

मीरा भाईंदर से नवभारत लाइव के लिए विनोद मिश्रा की रिपोर्ट

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