सुनेत्रा पवार, देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे डिजाइन फोटो
महाराष्ट्र

महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में महायुति की हार के 6 बड़े कारण, RSS और फडणवीस के गढ़ में कैसे जीती कांग्रेस?

Maharashtra MLC Election Mahayuti Loss Reasons: महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में भाजपा-शिवसेना-एसीपी की महायुति को 5 में से केवल 2 सीटों पर जीत मिली। जानिए महायुति की इस हार के 6 बड़े कारण।

आकाश मसने

Highlights

  • महाराष्ट्र विधान परिषद की 5 सीटों में से महायुति को सिर्फ 2 सीटें मिली

  • हार के बदा भाजपा-शिवसेना और एनसीपी में आरोप-प्रत्यारोप शुरू।

  • RSS और भाजपा के गढ़ नागपुर में कांग्रेस की जीत।

  • अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को हराया।

BJP Shiv Sena Rift In Maharashtra MLC Election: महाराष्ट्र विधान परिषद की 5 शिक्षक और स्नातक सीटों पर हुए चुनाव के बाद सत्ताधारी महायुति गठबंधन कलह शुरू हो गई है। महायुति में शामिल भाजपा, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना और सुनेत्रा पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने यह चुनाव मिलकर लड़ा था। एकसाथ होने के बावजूद महायुति के खाते में केवल 2 ही सीटें आई, तीन सीटों पर गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा।

इस चुनाव महायुति और भाजपा को सबसे बड़ा झटका RSS के गढ़ नागपुर में लगा। नागपुर में भाजपा प्रत्याशी सुधाकर कोहले को कांग्रेस के अभिजीत वंजारी के हाथों हार झेलनी पड़ी। महाराष्ट्र समेत 4 राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर हुए चुनावों में कांग्रेस को केवल नागपुर की ही सीट मिली। अभिजीत वंजारी की जीत ने कांग्रेस से जीरो का कलंक लगने बचा लिया।

इस चुनाव में महायुति को हार के बाद अंदरूनी कलह शुरू होगी है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। भाजपा ने तो इस हार जिम्मेदार शिवसेना को ठहरा दिया। आइए जाते है महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में भाजपा के हार के प्रमुख कारण क्या रहे।

1. भाजपा और शिवसेना की आपसी कलह

महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में महायुति की हार का सबसे बड़ा कारण भाजपा और शिवसेना की आपसी कलह रही। पुणे विभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए महायुति के अधिकृत उम्मीदवार कौस्तुभ गावडे थे। लेकिन शिवसेना ने अंतिम समय में सचिन सानप को समर्थन दे दिया। हालांकि इस सीट से भाजपा को जीत मिली, लेकिन इसका असर पुणे विभाग की स्नातक सीट पर हुआ। दोनों दलों के बीच आपसी तालमेल नहीं होने के कारण भाजपा उम्मीदवार स्मिता जाधव को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की हर्षदा देशमुख-जाधव के हाथों हार झेलनी पड़ी।

2. शिवसेना ने नहीं दिया भाजपा का साथ

भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि शिवसेना ने विधान परिषद चुनाव में पुणे और नागपुर में भाजपा और महायुति को साथ नहीं दिया। एक सीट पाने की लालसा में शिवसेना ने गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया जिससे महायुति को हार का सामना करना पड़ा।

3. छत्रपति संभाजीनगर में अब्दुल सत्तार का NCP के खिलाफ प्रचार

छत्रपति संभाजीनगर में महायुति की ओर से सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सतीष चव्हाण उम्मीदवार थे। वहीं विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाडी की ओर से शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के डॉ. प्रतापसिंह पाटील उम्मीदवार थे।

भाजपा का आरोप है कि छत्रपति संभाजीनगर में महायुति एकसाथ होने के बावजूद एकनाथ शिंदे की शिवसेना के नेता अब्दुल सत्तार ने महायुति उम्मीदवार सतीष चव्हाण के खिलाफ प्रचार किया, जिसका खामियाजा भुगतना पड़ा। यहां NCP के सतीष चव्हाण हार गए।

4. फडणवीस, गडकरी और RSS के गढ़ में भाजपा की हार

भाजपा को सबसे बड़ा झटका मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) के गढ़ नागपुर में लगा है। राज्य और केंद्र की राजनीति में कद्दावर नेताओं की गिनती में गिने जाने बड़े नामों के बावजूद अपने ही शहर में हार जाना भाजपा के लिए शर्मनाक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा समेत पूरा सत्ता पक्ष कांग्रेस पर महाराष्ट्र समेत 4 राज्यों की 28 में से एक भी सीट नहीं जीतने को लेकर तंज कस रहे थे पर अंतिम समय में नागपुर में पासा पलटा और कांग्रेस जीत गई।

5. नागपुर में भाजपा के अनिल सोले की बगावत

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) तीनों नागपुर से होने के बावजूद टिकट वितरण में तालमेल नहीं दिखा। भाजपा अनिल सोले को उम्मीद थी की उन्हें टिकट मिलेगी लेकिन भाजपा ने सुधाकर कोहले को अपना उम्मीदवार बनाया। टिकट न मिलने से नाराज अनिल सोले ने निर्दलीय पर्चा भर दिया। भाजपा ने उन्हें मनाने की काेशिश की लेकिन नामांकन वापिस लेने की अंतिम तिथि तक मनाने में नाकाम रही। अनिल सोले नामांकन वापिस नहीं ले पाए।

हालांकि बाद में अनिल सोले ने भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले को समर्थन देने का ऐलान किया। लेकिन वह काम नहीं आया। बैलेट पर अनिल सोले का नाम होने के कारण उनके समर्थकों ने भाजपा प्रत्याशी सुधाकर कोहले को वोट देने के बजाय अनिल सोले को दिया, जिससे भाजपा को नुकसान हुआ।

6. नितेश कराले के सेकेंड प्रेफरेंस वोट से लगी चोट

भाजपा ने नागपुर में कांग्रेस की जीत के लिए नितेश कराले के सेकेंड प्रेफरेंस वोटों को जिम्मेदार बताया। मंत्री नितेश राणे ने कहा कि कांग्रेस कराले गुरुजी के सेकेंड प्रेफरेंस वोट के दम पर जीते हैं। बता दें कि नितेश कराले शरद पवार गुट के नेता थे, लेकिन नागपुर में कांग्रेस प्रत्याशी होने के कारण कराले को टिकट नहीं मिला। ऐसे में नितेश कराले निर्दलीय चुनाव लड़ा।

नागपुर विभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना में निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराले के एलिमिनेशन के बाद उनके कुल 10,953 सेकंड प्रेफरेंस वोट दोनों मुख्य उम्मीदवारों में विभाजित हुए। इसमें कांग्रेस के अभिजीत वंजारी को कराले के सेकंड प्रेफरेंस वोटों में से 8,727 वोट मिले। वहीं भाजपा के सुधाकर कोहले को केवल 2,226 वोट मिले, जिससे भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।

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