लातूर में चारा उगाने के लिए किसानों को प्रति एकड़ 1.21 लाख रुपये तक की सहायता।
बिना पशुधन वाले किसान भी सिंचाई सुविधा होने पर योजना का लाभ उठा सकते हैं।
लातूर के किसान 1 नवंबर तक आवेदन तक कर सकते है आवेदन।
Latur Fodder Farming Financial Aid: महाराष्ट्र के लातूर जिले पर सूखे के खतरे के बीच जिला प्रशासन ने किसानों और पशुपालकों के लिए एक राहत भरी योजना शुरू की है। लातूर जिले में पशुओं के चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने उद्देश्य से चारा खेती प्रोत्साहन पहल की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को चारे की खेती के लिए प्रति एकड़ 1.21 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
लातूर जिला प्रशासन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस योजना के लिए आवेदन करने वाले किसान के पास खुद के पशुधन होना अनिवार्य नहीं है। ऐसे सभी किसान, जिनके पास नवंबर, दिसंबर और जनवरी के महीनों के दौरान सिंचाई का पर्याप्त पानी उपलब्ध है, वे इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। किसान उगाई गई चारे की फसल का उपयोग अपने मवेशियों के लिए कर सकते हैं या फिर इसे स्थानीय पशुपालकों को बेचकर अतिरिक्त मुनाफा कमा सकते हैं।
इस पहल के तहत किसानों को खेती में अपनी जेब से कोई खर्च नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम 'महाबीज' की ओर से जिला वार्षिक योजना के माध्यम से 'स्पीडफीड' चारा ज्वार के उच्च गुणवत्ता वाले बीज किसानों को मुफ्त उपलब्ध कराए जाएंगे।
लातूर जिला प्रशासन ने रबी सीजन में सिंचाई की सुविधा वाले सभी पात्र किसानों से जल्द से जल्द आवेदन करने की अपील की है। योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 1 नवंबर तय की गई है।
लातूर के जिलाधिकारी भरत बस्तेवाड़ ने विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (VB-G RAM G Scheme) के तहत इस अनूठी चारा खेती योजना का खाका तैयार किया था, जिसे अब महाराष्ट्र सरकार से औपचारिक मंजूरी मिल चुकी है।
प्रशासन के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत प्रति एकड़ कुल ₹1,21,815 की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसमें 84,956 रुपये मजदूरी और 36,859 रुपये बीज, उर्वरक तथा अन्य सामग्री के लिए शामिल हैं।
यह राशि भूमि की तैयारी, बुवाई, खाद-उर्वरक डालने, सिंचाई, निराई-गुड़ाई और कटाई तक के सभी चरणों को कवर करती है। प्रशासन का अनुमान है कि किसान सरकारी सहायता प्राप्त करने के साथ-साथ महज चार महीनों में उगे हुए चारे को बेचकर प्रति एकड़ ₹1.5 लाख तक की कमाई भी कर सकते हैं।