

रायगड जिले के कर्जत तालुका के सायडोंगर इलाके से पेड़ काटे जा रहे।
गुजरात स्थित टोरेंट ग्रुप की 3,000 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना।
राज ठाकरे की मनसे ने सूखे के बीच पेड़ कटाई पर उठाए सवाल।
टोरेंट ग्रुप की 3,000 मेगावाट क्षमता वाली पंप-स्टोरेज जलविद्युत परियोजना प्रस्तावित।
MNS Raises Questions Raigad Forest Tree Felling: महाराष्ट्र में एक तरफ किसान सूखे की मार झेल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विकास परियोजनाओं के नाम पर राज्य के प्राकृतिक संपदा और जंगलों पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर रायगड जिले के कर्जत तालुका से बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जाने का मुद्दा उठाकर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है।
मनसे द्वारा शेयर किए गए वीडियो के अनुसार, रायगड जिले के कर्जत स्थित सायडोंगर इलाके से बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की खबरें सामने आ रही हैं। यह पूरी कवायद गुजरात स्थित टोरेंट ग्रुप की 3,000 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना को स्थापित करने के लिए की जा रही है।
राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिए कि "महाराष्ट्र भीषण सूखे की चपेट में है, किसान आसमान की ओर देखकर बारिश की प्रार्थना कर रहे हैं, और इसी बीच राज्य के जंगलों को काटा जा रहा है।
रायगड जिले के कर्जत तालुका के सायडोंगर इलाके से बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जाने की खबरें सामने आई हैं। यह सब गुजरात स्थित 'टोरेंट ग्रुप' की 3,000 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना (हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट) के लिए किया जा रहा है।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) की पोस्ट में आगे लिखा है कि "लगभग 13,500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस पंप-स्टोरेज जलविद्युत परियोजना के लिए 377 हेक्टेयर जमीन प्रस्तावित है, जिसमें से 233 हेक्टेयर जमीन वन क्षेत्र है।
राज ठाकरे की पार्टी मनसे ने सवाल उठाते हुए लिखा कि ऐसे समय में जब सूखा, पानी की कमी और किसानों की बदहाली गंभीर स्तर पर पहुंच गई है, इतने बड़े वन क्षेत्र को हटाने से पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा? स्थानीय किसानों, आदिवासी समुदायों, जैव विविधता और प्राकृतिक जल स्रोतों की रक्षा कौन करेगा?
राज ठाकरे की पार्टी ने कहा कि बिजली उत्पादन और विकास निश्चित रूप से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन विकास के नाम पर महाराष्ट्र की प्राकृतिक संपदा के नुकसान की कीमत कौन चुकाएगा? महाराष्ट्र के जंगल, नदियां और जमीन केवल औद्योगिक परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले संसाधन नहीं हैं, ये हमारी आने वाली पीढ़ियों की प्राकृतिक धरोहर हैं।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने महाराष्ट्र सरकार से अपील करते हुए लिखा कि इस परियोजना से जुड़ा कोई भी फैसला महाराष्ट्र के व्यापक हित, पर्यावरण और स्थानीय लोगों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए ही लिया जाना चाहिए।