महादेवी हथिनी (सोर्स: सोशल मीडिया) 
कोल्हापुर

महादेवी हथिनी की कोल्हापुर वापसी को लेकर कवायद तेज, सुप्रीम कोर्ट में आज होगी सुनावाई

Mahadevi Elephant News: कोल्हापुर की महादेवी हथिनी विवाद में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। महादेवी को वनतारा शिफ्ट करने के विराेध कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

आकाश मसने

Hearing on Mahadevi Elephant in Supreme Court: महाराष्ट्र के कोल्हापुर की महादेवी हथिनी को गुजरात के वनतारा शिफ्ट करने के बाद से स्थानीय लोगों में मोर्चा खोल दिया है और हथिनी का वापस लाने की मांग कर रहे हैं। इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। 11 अगस्त को मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने हथिनी को वनतारा भेजे जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी।

स्थानीय लोग, धार्मिक संगठन और राज्य सरकार हथिनी के स्थानांतरण पर अलग-अलग राय रख रहे हैं। पिछले 34 वर्षों से माधुरी (महादेवी) हथिनी कोल्हापुर स्थित स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान मठ में रह रही है।

इसी वर्ष बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ ने हथिनी को स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। हालाँकि, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हथिनी को जबरन ले जाया गया था और यह मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।

जानिए क्या है मामला?

दरअसल, 16 जुलाई को बंबई उच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि माधुरी को वनतारा में शिफ्ट किया जाए। PETA इंडिया की ओर से हथिनी की सेहत, गठिया और मानसिक तनाव को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद कोर्ट ने यह आदेश दिया था। माधुरी या महादेवी हथिनी को वनतारा शिफ्ट किए जाने पर कोल्हापुरवासियों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने उसको वापस लाने के लिए हस्ताक्षर अभियान भी चलाया। उन्होंने धार्मिक परंपराओं और भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।

वनतारा ने इस मामले में क्या कहा?

वन्यजीव संगठन वनतारा ने 7 अगस्त को इस मामले में एक बयान जारी किया था। इसमें कहा गया कि माधुरी हथिनी को वनतारा में शिफ्ट करने का निर्णय उसका नहीं था, बल्कि यह सुप्रीम कोर्ट और बंबई उच्च न्यायालय के आदेश के तहत हुआ।

32 साल से जैन मठ में रह रही थी माधुरी

कोल्हापुर के नांदणी गांव स्थित जैन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान मठ में 1992 में माधुरी नाम की एक हथिनी लाई गई थी। इस जैन मठ में 700 वर्षों से हाथियों को रखने की परंपरा है। यह धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का एक हिस्सा है। माधुरी हथिनी को मात्र 4 वर्ष की आयु में यहां लाया गया था। वह 32 वर्षों से यहां रह रही थी।

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