Devendra Fadnavis Slams Rahul Gandhi: महाराष्ट्र की राजनीति में जुबानी जंग अपने चरम पर है। जालना में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और संदीप दीक्षित पर तीखा हमला बोला है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की महिला राष्ट्रप्रमुख के खिलाफ की गई टिप्पणियों से नाराज फडणवीस ने इसे छिछोरापन करार दिया और कहा कि सार्वजनिक जीवन में इस तरह की भाषा का स्तर गिरना चिंताजनक है।
शुक्रवार को जालना में रेशम कोष बाजार के लोकार्पण के बाद मीडिया से बात करते हुए फडणवीस काफी आक्रामक नजर आए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और संदीप दीक्षित ने जिस तरह की बातें देश के प्रधानमंत्री और एक विदेशी महिला नेता के बारे में की हैं, वह बेहद निचले स्तर की राजनीति है।
फडणवीस ने तंज कसते हुए कहा, ऐसा छिछोरापन तो गली के नेता भी नहीं करते। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में मांग की कि इस अशोभनीय टिप्पणी के लिए राहुल गांधी और संदीप दीक्षित को पूरे राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए।
राहुल गांधी पर हमले के साथ-साथ फडणवीस ने महाराष्ट्र की आंतरिक राजनीति और शिवसेना के असली हकदार को लेकर भी बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि 2024 के चुनावों के परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि जनता की अदालत में एकनाथ शिंदे की शिवसेना ही असली शिवसेना है। उन्होंने विश्वास जताया कि अब जब यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में है, तो वहां से भी शिंदे गुट के पक्ष में ही फैसला आएगा।
हाल ही में पुणे के चाकण इंडस्ट्रियल एरिया को लेकर शरद पवार द्वारा उठाए गए सवालों पर भी फडणवीस ने अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि शरद पवार एक वरिष्ठ नेता हैं और वे राज्य के हित के बारे में सोचते हैं, इसलिए उन तक गलत जानकारी न पहुंचे, इस उद्देश्य से उन्होंने तथ्यों के साथ पवार को जवाब दिया है।
फडणवीस ने स्वीकार किया कि चाकण में विभिन्न सरकारी प्रणालियों के बीच समन्वय की कमी है, जिसे सुधारने के लिए जिलाधिकारी को समन्वयक नियुक्त किया गया है।
केंद्र सरकार द्वारा जाति आधारित जनगणना कराने के फैसले का स्वागत करते हुए फडणवीस ने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह मांग कई वर्षों से लंबित थी, जिसे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने स्वीकार किया है। इसकी प्रक्रिया पूरी योजना के साथ विभिन्न चरणों में लागू की जाएगी।
कुल मिलाकर, देवेंद्र फडणवीस का यह संबोधन न केवल विपक्षी नेताओं पर हमला था, बल्कि आगामी राजनीतिक दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट करने वाला रहा।