Deepmala Kale Vs Pratibha Shinde: महाराष्ट्र के जलगांव शहर में राजनीतिक पारा एक बार फिर चढ़ गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की नेता प्रतिभा शिंदे द्वारा भाजपा मेयर दीपमाला काले के स्वामित्व वाले एक होटल पर अवैध अतिक्रमण के आरोप लगाए जाने के बाद दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। शिंदे का आरोप है कि मेयर के प्रभाव के चलते होटल निर्माण में नियमों की अनदेखी की गई है। प्रतिभा शिंदे के आरोपों का करारा जवाब देते हुए मेयर दीपमाला काले ने सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने शिंदे द्वारा दी गई जानकारी की सत्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले उन्हें तथ्यों की जांच कर लेनी चाहिए थी।
दीपमाला काले ने स्पष्ट किया कि जिस होटल की बात हो रही है, वह उनके पति के नाम पर नहीं, बल्कि स्वयं उनके नाम पर पंजीकृत है। उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि होटल का निर्माण अवैध अतिक्रमण पर किया गया है। मेयर ने एक पारदर्शी रुख अपनाते हुए कहा, यदि प्रतिभा शिंदे का कहना है कि यह नगर निगम कमिश्नर की कार्रवाई का विषय है, तो कमिश्नर को उचित जांच करनी चाहिए। क्या वाकई वहां कोई अतिक्रमण है? यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो प्रशासन को कानून के तहत उचित कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।
जलगांव की राजनीति में भाजपा और राकांपा के बीच इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप नए नहीं हैं। इससे पहले भी जलगांव नगर निगम में विकास कार्यों और टेंडरों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक होती रही है। प्रतिभा शिंदे, जो अक्सर जनहित के मुद्दों और प्रशासनिक अनियमितताओं पर आवाज उठाती रही हैं, ने इस बार सीधे मेयर के निजी व्यवसाय को निशाने पर लिया है। जानकारों का मानना है कि आने वाले चुनावों के मद्देनजर इस तरह के भ्रष्टाचार और अतिक्रमण के आरोप शहर की राजनीति को और अधिक गरमाएंगे। मेयर काले द्वारा जांच की चुनौती देना यह दर्शाता है कि वे अपने दस्तावेजों और कानूनी पक्ष को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं।
यह भी पढ़ें: मेरे पिता ने सींचा है उस भाजपा को, जिसमें आप मजे कर रही हैं, रोहिणी खड़से का चित्रा वाघ पर प्रहार
इस विवाद ने अब जलगांव नगर निगम के प्रशासनिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि शहर की प्रथम नागरिक यानी मेयर के खिलाफ इस तरह के आरोप लगे हैं, तो प्रशासन को बिना किसी राजनीतिक दबाव के इसकी निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। जलगांव में पिछले कुछ समय से अवैध निर्माणों और अतिक्रमण के खिलाफ मुहिम चल रही है, ऐसे में यह मामला नगर निगम की कार्यप्रणाली के लिए एक एसिड टेस्ट बन गया है।