किसानों की आर्थिक नुकसान (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
गोंदिया

किसानों की आर्थिक नुकसान, प्रशासन से समाधान की मांग, खरीफ धान की फसल रौंद रहे जंगली सुअर

Vidarbha Farmers: किसानों ने खरीफ मौसम के लिए खेतों में धान की रोपाई की है और वह अभी लहलहा रही है। जिसे जंगली सुअर रौंदकर नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है।

आंचल लोखंडे

Gondia News: किसानों ने खरीफ मौसम के लिए खेतों में धान की रोपाई की है और वह अभी लहलहा रही है। जिसे जंगली सुअर रौंदकर नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। वहीं, किसानों को जंगली सुअर से जान का खतरा भी मंडराने लगा है। किसानों के इस धान की फसल को इन दिनों जंगली सुअर नुकसान पहुंचा रहे हैं। क्षेत्र में जंगली सुअर आ रहे हैं और फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

शाम होते ही सूअरों का झुंड खेतों की ओर पहुंचता है और रोपाई की गई धान की फसल को चौपट कर रहा है। किसानों ने बताया कि खेतों में खरीफ मौसम के लिए धान की रोपाई की गई है जो अभी लहलहा रही है। इस अवस्था में जंगली सुअर धान फसल को खाकर व रौंदकर नुकसान पहुंचा रहे हैं। वहीं खेत में अपने रहने का निवास बनाकर यहां पर रात में डेरा डालकर रहते हैं। जंगली सुअर के उपद्रव से धान फसल का नुकसान हो रहा है। बारिश के मौसम में किसान खेत फसल की रखवाली नहीं कर सकता।

धान की रोपाई

जिन किसानों के खेतों में हल्की कम दिनों में तैयार होने वाली धान फसल है उनका सुअर अधिक नुकसान करते हैं। संपूर्ण परिसर में कम दिनों में तैयार होने वाली धान कम प्रमाण में किसान लगाते हैं और यह धान सुअरों को खाने में मिठास लगने से व इन्हें अभी कम प्रमाण में खाने को मिलने से इन किसानों की फसलों पर टूट पड़ते हैं। धान की रोपाई होने के पहले सुअरों ने खेतों की मेड़ पर लगे हुए सुरण के कंद, कोचई कंद खोदकर खा गए। मेढ़ों को खोदकर केचुआ गिली मिट्टी के अंदर रहते हैं वह खोदकर खा गए।

दिन-रात कर रहे रखवाली

अब किसानों के खेतों की मेढ़ों पर तुअर फसल लगी है उसे भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। सुअर पूरे मेढ़ों को खोद डालते हैं। खेतों में तार, झिल्ली व सफेद खाली - प्लास्टिक की बोरी पेड़ों पर लटकाई देखी जाती है व लोहे के तार खेतों के आस पास लगाए जाते हैं। इनके पांव को तार का स्पर्श होने से वह डर कर भागते हैं। ऐसी सोच किसानों की बनी हुई है।

इसलिए वह यह सब तरकीबे - किसान करता है। सफेद पट्टी, झिल्ली की जो रात में - चमकते रहती है व सफेद रहने से सुअर इसे आदमी होगा यह सोच कर थोड़ा बहुत डरते हैं, फिर भी इन प्राणियों से फसल बचाना टेढ़ी खीर है।

प्रशासन को मुआवजा देने का तरीका अव्यवस्थित

यह जानवर अब बिना किसी डर के दिन में भी घूमते हैं। सरकार के ही जानवर नुकसान करते हैं। जबकि कानून नियम के तहत मुआवजा देने का तरीका तो तारीफे काबिल है। नुकसान होता है 10 हजार रु। का तथा 3 से 4 हजार रु। मुआवजा मिलता है।

उसके लिए भी पटवारी, कृषि विभाग आदि के प्रमाणपत्र व कई तरह के दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं इसके बाद भी 1 वर्ष तक राशि नहीं मिलती। किसानों की पुकार है कि इन जंगली प्राणियों का उचित बंदोबस्त किया जाए या उन्हें पकड़कर रिजर्व जंगल परिसर में छोड़ दें और किसानों को अपनी फसल का बगैर किसी डर के उत्पादन करने दें।

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