Salekasa Paddy Procurement: धान बिक्री के लिए किसानों ने शासन के निर्देश अनुसार ईफसल रिपोर्टिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसके बावजूद खरीदी केंद्रों को पर्याप्त लक्ष्य नहीं मिलने के कारण किसानों का धान नहीं खरीदा जा रहा है। कई किसानों को धान लेकर खरीदी केंद्र पहुंचने के बाद लक्ष्य समाप्त होने की जानकारी देकर वापस लौटाया जा रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि वे पहले से ही बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, तेज हवाओं, तूफान और फसलों में लगने वाली विभिन्न बीमारियों से जूझ रहे हैं।
ऐसे में खरीदी प्रक्रिया में हो रही देरी और अव्यवस्था उनकी परेशानियों को और बढ़ा रही है। सरकार ने खरीफ सीजन 2025 के धान पर प्रति हेक्टेयर 20 हजार रु. बोनस देने का आश्वासन दिया था। लेकिन फसल बिकने के कई महीने बाद भी बोनस को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
किसानों का आरोप है कि इस देरी के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है और सरकार के प्रति असंतोष बढ़ रहा है। किसानों का कहना है कि खाद, बीज और खेती में उपयोग होने वाली अन्य आवश्यक सामग्री की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं की गई। इससे खेती की लागत बढ़ने के बावजूद किसानों की आय में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है।