जब्त वाहन (सोर्स: सोशल मीडिया) 
गोंदिया

गोंदिया के पुलिस थाने बने 'कबाड़खाना': सालों से जब्त वाहनों में पनप रहे सांप-चूहे, मालिकों ने फेरा मुंह

Gondia Police Station: गोंदिया जिले के पुलिस थाने कानूनी कार्रवाई में जब्त वाहनों के कारण कबाड़खाने बन गए हैं। नीलामी न होने और मालिकों द्वारा वाहन न ले जाने से परिसर में सुरक्षा खतरा बढ़ा है।

रूपम सिंह

Gondia News : कार्रवाई में जब्त किए गए कई वाहन पुलिस थाना परिसर में खड़े हैं। न केवल पुलिस थाना, बल्कि वाहनों को आरटीओ कार्यालय परिसर में भी लाया जाता है। कानूनी समझौते के बाद भी ये वाहन जंग खा जाती है और खराब हो जाती है क्योंकि उनके मालिक उन्हें बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं करते हैं। इन क्षतिग्रस्त वाहनों के कारण जिले के थाने 'कबाड़खाना' बन गए हैं। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में वाहन मालिकों की तलाश में तलाशी अभियान चलाया गया।

उन पर जुर्माना लगाया गया है और उनके वाहन वापस कर दिए गये हैं। वाहनों को जब्त करने से वाहनों का भंडार हो गया है। दुर्घटनाग्रस्त वाहन, अवैध रेत खनन, खनिज परिवहन, चोरी के वाहन, अवैध शराब परिवहन सहित आर्थिक अपराध में शामिल व्यक्तियों के जब्त वाहन थाना परिसर में पड़े हुए हैं।

इन वाहनों में सांप और चूहे भी रहते हैं। क्योंकि इन वाहनों को चालू हालत में रखा जाता है, इसलिए इनमें ईंधन भी होता है। कई बार इन वाहनों से ईंधन लीक होने के कारण आग लगने की घटनाएं भी होती हैं। ऐसे में इन जब्त वाहनों की वजह से पुलिस थाने में आने वाले नागरिकों की सुरक्षा खतरे में है।

दोपहिया वाहनों की संख्या सबसे ज्यादा

नंबर प्लेट न होने के कारण ये वाहन वर्षों तक वहीं पड़े रहते हैं। असली मालिक का पता न चलने से पुलिस भी बेबस हैं। इसलिए पुलिस थानों में ऐसे वाहनों की संख्या बढ़ गई है। पुलिस के हाथ लगने के बाद इन वाहनों को जब्त कर लिया जाता है। लेकिन कुछ पुलिस थाने नई भव्य इमारतों में शुरू हो गए हैं, लेकिन यह इमारत भी पुराने वाहनों से पटी पड़ी है। इसके चलते नए थाने का परिसर भी कबाड़खाना जैसा दिखने लगा है।

कर्मचारियों का आना-जाना मुश्किल

यह सच है कि जब्त वाहनों की वजह से पुलिस थाने के कर्मचारियों को भी आने-जाने में मुश्किल होती है। मालिकों से उम्मीद की जाती है कि वे ये वाहन वापस ले जाए, लेकिन कोई अच्छा प्रतिसाद नहीं मिलता। कुछ माह पहले हमने जिला पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में वाहन मालिकों की तलाश में अभियान चलाया था। वाहनों पर जुर्माना लगाकर वाहन मालिक को सौंप दिया गया है। - नागेश भास्कर, पुलिस निरीक्षक, यातायात शाखा, गोंदिया

वाहनों की मरम्मत में बहुत अधिक लागत

गोंदिया पुलिस विभाग ने पिछले कई वर्षों से वाहनों की नीलामी नहीं की है, इसलिए रामनगर, यातायात शाखा, शहर पुलिस, दवानीवाड़ा, ग्रामीण थाने सहित अन्य थाना परिसर में कबाड़ वाहन देखे जाते हैं। चोरी या ऐसे मामलों में जब्त किए गए वाहनों को थाना परिसर में रखा जाता है। इनमें से कई नष्ट हो चुके हैं। नीलामी में खरीदे गए वाहनों की मरम्मत में बहुत अधिक लागत आती है, इसलिए नीलामी को जनता से बहुत कम प्रतिसाद मिलता है।

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