Village Of Books Marathi Language: गोंदिया में मराठी भाषा के विकास, उसके अभिजात भाषा के दर्जे को और मजबूत करने तथा वैश्विक स्तर पर मराठी को प्रमुख भाषा के रूप में प्रतिष्ठा दिलाने के लिए गांव-गांव में पढ़ने की संस्कृति विकसित करना आवश्यक है।
इसी उद्देश्य से 'पुस्तकों का गांव की संकल्पना लागू की गई है। विदर्भ का पहला 'पुस्तकों का गांव' नवेगांव बांध में शुरू हो रहा है, यह खुशी की बात है। ऐसा प्रतिपादन राज्य के मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत ने किया। इस अवसर पर मंत्री
सामंत ने झाड़ीबोली साहित्य सम्मेलन के लिए राज्य सरकार की ओर से हर वर्ष 25 लाख रु. का अनुदान देने की घोषणा भी की। गोंदिया जिले को समृद्ध वन संपदा के साथ ही साहित्य और सांस्कृतिक विरासत प्राप्त हुई है।
प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ मारुति चितमपल्ली के चरणों से भी यह भूमि पवित्र हुई है। जिले में पढ़ने की संस्कृति को और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध नवेगांव बांध का चयन पुस्तकों के गांव के रूप में किया है। आज यहां पहले दालन का उद्घाटन करते हुए विशेष आनंद हो रहा है।
उन्होंने कहा कि झाडीबोली साहित्य सम्मेलन के लिए शासन की ओर से प्रतिवर्ष 25 लाख रु. का अनुदान दिया जाएगा, मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा प्राप्त होने में उसकी समृद्ध ग्रंथ संपदर, संत परंपरा और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण योगदान है।
मराठी के साथ-साथ विभिन्न बोली भाषाओं का भी विकास होना चाहिए, पुस्तकों का गांव' की संकल्पना इस दिशा में प्रेरणादायी साबित होगी। महाराष्ट्र की सीमा पर 'वादा से बांदा की संकल्पना के अनुरूप राज्य के प्रत्येक क्षेत्र में 'पुस्तकों का गांव और 'कविता का गांव स्थापित करने का सरकार का मानस है, ऐसी जानकारी उन्होंने दी।
उन्होंने कहा कि मराठी माध्यम से शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद वैश्विक स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है। इस दौरान उन्होंने मातृभाषा की ताकत पर जोर दिया।
महाराष्ट्र में उद्योग स्थापित करने के लिए आने वाले दूसरे राज्यों के लोगों को मराठी भाषा सीखनी वाहिए, प्रस्तावना प्रा. डॉ. शरद मेश्राम ने रखी। संचालन सहायक प्रध्यापक डॉ. लक्ष्मीकांत कायगते ने किया।