Jogisakhara Gotul: आदिवासी समाज की सांस्कृतिक परंपरा तथा सामाजिक एकता का प्रतीक जोगीसाखरा में गोटुल भवन आज ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी और व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। इस अध्ययन केंद्र के विस्तार और विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विधायक निधि से विशेष आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ऐसी मांग सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप घोडाम ने विधान परिषद सदस्य अभिजीत वंजारी को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि आदिवासी गोंड समाज का पारंपरिक सामाजिक, सांस्कृतिक एवं ज्ञान केंद्र माने जाने वाला ‘गोटुल’ आज आधुनिक शिक्षा का भी प्रभावी केंद्र बन चुका है। आरमोरी तहसील के जोगीसाखरा स्थित आदिवासी गोटुल सांस्कृतिक भवन में संचालित अध्ययन केंद्र अनेक गरीब, प्रतिभाशाली एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले आदिवासी तथा गैर-आदिवासी विद्यार्थियों के लिए आशा की किरण साबित हो रहा है। यहां से भविष्य के प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस कर्मचारी और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले युवा तैयार हो रहे हैं।
गोटुल संस्था आदिवासी संस्कृति के संरक्षण, परंपराओं के संवर्धन और सामूहिक जिम्मेदारियों की शिक्षा देने के लिए प्रसिद्ध रही है। वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक दौर में ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन का अवसर उपलब्ध कराने हेतु गोटुल भवन का प्रभावी उपयोग अध्ययन केंद्र के रूप में किया जा रहा है। इससे पारंपरिक संस्कृति और आधुनिक शिक्षा का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। जोगीसाखरा गोटुल भवन के निर्माण के लिए पूर्व विधायक स्वर्गीय हरिराम वरखड़े ने आदिवासी गोंड समाज के हित में अपनी भूमि दान की थी। उनकी दूरदर्शिता से निर्मित इस भवन में विद्यार्थियों को शांत वातावरण, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवश्यक संदर्भ पुस्तकें, समाचार पत्र और अन्य मूलभूत सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे क्षेत्र के विद्यार्थियों को काफी लाभ मिल रहा है।
वर्तमान में अध्ययन केंद्र में प्रतिदिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययन के लिए पहुंच रहे हैं। सफल विद्यार्थियों के अनुभवों से अन्य युवाओं को भी प्रतियोगी परीक्षाओं की ओर प्रेरणा मिल रही है। यह केंद्र विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, प्रेरणा और सकारात्मक ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है। हालांकि बढ़ती संख्या को देखते हुए यहां कंप्यूटर, इंटरनेट सुविधा, डिजिटल लाइब्रेरी, प्रतियोगी परीक्षाओं की नवीनतम पुस्तकें, फर्नीचर, स्वच्छ पेयजल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
ये भी पढ़े: सलाम ऐसे जज्बे को! नागपुर के 70 वर्षीय बुजुर्ग ने जीवनभर की जमा-पूंजी देश के वीरों पर की न्योछावर
इसलिए स्थानीय विकास निधि से विशेष अनुदान स्वीकृत कर जोगीसाखरा गोटुल अध्ययन केंद्र का सर्वांगीण विकास किया जाए, ऐसी मांग दिलीप घोडाम ने विधायक अभिजीत वंजारी से की है। इस अवसर पर विधायक रामदास मसराम, किसान नेते महेंद्र बाम्हणवाडे, जिला कांग्रेस के अध्यक्ष विश्वजीत कोवासे, शिक्षण महर्षि समशेरखा पठान, जिला कार्यवाह अजय लोंढे, आरमोरी तहसील कांग्रेस अध्यक्ष मिलिंद खोब्रागड़े, गटनायक माणिक भोयर, पार्षद अक्षय बागड़े, पार्षद मेघा मने, धनपाल मिसार, भजन उसेंडी, अनिल किरमे समेत अनेक नागरिक उपस्थित थे।