Maharashtra Ashram School Deaths: राज्य के आश्रम स्कूल बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं और पिछले दो सालों में इनमें पढ़ने वाले 584 बच्चों की मौत हो चुकी है। पिछले दिनों गड़चिरौली के एक आवासीय स्कूल के छात्रावास में सर्पदंश से 3 आदिवासी बच्चियों की मौत के बाद अधिकारियों ने यह आंकड़े बताए हैं।
आदिवासी विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मौत की वजहों में सर्पदंश, सिकल सेल बीमारी, गंभीर बीमारी, दुर्घटना और आत्महत्या शामिल हैं। अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र में सरकार द्वारा चलाए जा रहे 500 और सरकारी सहायता प्राप्त 513 आश्रम स्कूल हैं, जो आदिवासी बच्चों के लिए आवासीय सुविधाएं प्रदान करते हैं।
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पिछले दो साल में सरकारी आश्रम स्कूलों में 384 और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 200 छात्रों की मौत दर्ज की गई है।
अधिकारी ने बताया कि 2024-25 में आश्रम स्कूल के 170 छात्रों की मौत हुई, जबकि 2025-26 में 214 छात्रों की जान गई। उन्होंने कहा कि इनमें से 36 छात्रों की मौत स्कूल परिसर में और 348 की मौत घर पर हुई।
सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 2024-25 में 81 और अगले वितीय वर्ष में 119 छात्रों की मौत हुई। इनमें से 30 छात्रों की मौत स्कूल परिसर में और 170 की घर पर हुई।
कांग्रेस का आरोप है कि गढ़चिरौली के एक आवासीय स्कूल छात्रावास में छात्राओं की मौत के मामले भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली 'महायुति' सरकार के दौरान प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का नतीजा थे।
धनोरा तालुका मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर जप्तलाई गांव में स्थित एक सरकारी सहायता प्राप्त आदिवासी आवासीय स्कूल के छात्रावास में नौ अगस्त की मध्यरात्रि को जहरीले सांप के काटने से तीन आदिवासी लड़कियों की मौत हो गई और उतनी ही लड़कियों का इलाज हो रहा है।
इस घटना के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को सरकारी सहायता प्राप्त आवासीय स्कूल का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द करने का आदेश दिया।