Gadchiroli Korchi Bridge Damage: गड़चिरोली जिला कोरची तहसील के नवरगांव-भर्रीटोला मार्ग पर पुल के सामने की मिट्टी बारिश के पानी के साथ बह जाने से इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
विशेषतः पिछले दो वर्षों में इसी पुल के आसपास की मिट्टी और सड़क का हिस्सा दूसरी बार बह गया है। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नागरिकों ने संबंधित कार्य की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
कोरची तहसील मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर नवरगांव-भरीटोला मार्ग स्थित है। भरीटोला के नागरिकों के लिए नवरगांव ग्राम पंचायत तथा कोरची तहसील मुख्यालय तक पहुंचने के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है।
पहले इस मार्ग से आवागमन के दौरान नागरिकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इसके बाद वर्ष 2020-21 में जलसंधारण विभाग द्वारा सामान्य जिला वार्षिक योजना के तहत पुलवजा बंधारा का निर्माण किया गया था। बताया जाता है कि, इस कार्य की शुरुआत 22 दिसंबर 2020 को हुई थी और 31 मार्च 2021 को निर्माण कार्य पूरा किया गया।
हालांकि निर्माण पूरा होने के कुछ ही वर्षों बाद पुल के आसपास की मिट्टी बहने की समस्या सामने आने लगी। पिछले वर्ष भी पुल का कुछ हिस्सा बह जाने के कारण मार्ग पर यातायात बंद हो गया था। इस वर्ष फिर उसी स्थान पर बड़े पैमाने पर मिट्टी बह जाने से नागरिकों के लिए इस मार्ग से आवागमन करना जोखिम भरा हो गया है।
गड़चिरोली जिला कोरची तहसील के नवरगांव ग्राम पंचायत होने के कारण भरीटोला के नागरिकों को विभिन्न सरकारी एवं ग्राम पंचायत संबंधी कार्यों के लिए नवरगांव जाना पड़ता है, लेकिन मार्ग बंद होने के कारण अब नागरिकों को 7 से 8 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर यात्रा करनी पड़ रही है।
इसका सबसे अधिक असर विद्यार्थियों, किसानों तथा रोजाना मजदूरी के लिए आने-जाने वाले नागरिकों पर पड़ रहा है। वहीं नवरगांव से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित दूसरे पुल के पास भी मिट्टी बहने की स्थिति सामने आई है। इससे आसपास के नागरिक, विद्यार्थी और किसानों की परेशानी और बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, इस कार्य पर सरकार के करीब 20 लाख 70 हजार रुपये खर्च हुए हैं। इसके बावजूद दो वर्ष के भीतर पुल के आसपास की मिट्टी दो बार बह जाने से नागरिक निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं।
कोरची तहसील के नवरगांव ग्राम पंचायत के नागरिकों का सवाल है कि, लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी यदि सड़क और पुल की ऐसी स्थिति हो रही है तो क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की उचित जांच की गई थी? क्या संबंधित विभाग द्वारा निर्माण कार्य की पर्याप्त निगरानी की गई थी? इन सवालों का जवाब अब संबंधित विभाग से मांगा जा रहा है।