गड़चिरोली सड़क आंदोलन (सोर्सः सोशल मीडिया)
गड़चिरोली

गांव तक सड़क होती, तो मेरी 3 माह की बेटी बच जाती... पीडित मां ने अहेरी के आंदोलन में व्यक्त किया आक्रोश

Tribal Villagers Protest: गड़चिरोली के अहेरी में 5 गांवों को जोड़ने वाली सड़क की मांग पर आदिवासियों का आंदोलन जारी है। ग्रामीणों ने सड़क के अभाव में 14 महीने में 6 मौतों का दावा किया।

आंचल लोखंडे

Highlights:

  • गड़चिरोली के अहेरी तहसील में पांच गांवों को जोड़ने वाली करीब 22 किलोमीटर सड़क की मांग को लेकर आंदोलन जारी है।

  • चिरेपल्ली की रुपाली मनोज आलाम ने सड़क के अभाव में अपनी तीन माह की बेटी को खोने की पीड़ा बताई।

  • आंदोलनकारियों ने दावा किया कि पिछले 14 महीनों में समय पर उपचार नहीं मिलने से छह लोगों की मौत हुई।

Aheri Road Construction: 'गांव तक सड़क होती, तो मेरी तीन माह की बेटी बच जाती' अपनी मासूम बच्ची को खो चुकी चिरेपल्ली की रुपाली मनोज आलाम ने जब अधिकारियों के सामने यह व्यथा सुनाई, तो आंदोलनस्थल पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

सड़क के अभाव में बच्ची को समय पर उपचार नहीं मिल सका और उसकी मौत हो गई। एक मां की इस पीड़ा ने दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया। अहेरी तहसील के पांच गांवों को जोड़ने वाली करीब 22 किलोमीटर लंबी सड़क की मांग को लेकर शुरू हुआ ठिय्या आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। करीब 28 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर अहेरी पहुंचे आदिवासी ग्रामीण अपनी मांग पर अडिग हैं।

दुर्गम गांवों की गंभीर स्थिति

आंदोलनकारियों ने सड़क की मांग के साथ ही सड़क के अभाव में समय पर उपचार नहीं मिलने से जान गंवाने वाले छह लोगों के मृत्यु प्रमाणपत्र भी अधिकारियों के सामने रखे। आंदोलनकारियों का दावा है कि पिछले 14 महीनों में सड़क के अभाव में मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाने के कारण छह लोगों की मौत हुई। ग्रामीणों ने इन मृत्यु प्रमाणपत्रों के माध्यम से दुर्गम गांवों की गंभीर स्थिति प्रशासन के सामने रखी।

आंदोलनकारियों से की चर्चा

इस दौरान आंदोलनस्थल पर पहुंचे सहायक जिलाधिकारी तथा उपविभागीय अधिकारी व प्रकल्प अधिकारी शिवांश सिंह और प्रभारी अपर जिलाधिकारी शुभम पाटील ने आंदोलनकारियों से चर्चा की। प्रशासन की ओर से दिसंबर तक सड़क निर्माण कार्य शुरू करने का आश्वासन दिया गया। हालांकि, ग्रामीणों ने पहले भी आश्वासन मिलने की बात कहते हुए स्पष्ट किया कि जब तक सड़क का प्रत्यक्ष निर्माण कार्य शुरू नहीं होता, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।

बुनियादी सुविधा का अभाव

दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या बना हुआ है। खासकर गर्भवती महिलाओं, बच्चों और गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने से गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से बेहतर होगा और आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस सहित अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन के आश्वासन पर टिकी हैं और वे सड़क निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की मांग कर रहे हैं।

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