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दिल्ली हाई कोर्ट आज AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर आदेश सुनाएगा।
नेहा बोरा ने 10,000 रुपये का बॉन्ड भरने का नोटिस को चुनौती दी थी।
सौरव दास और आशुतोष रांका गुरुवार को क्राइम ब्रांच के सामने पेश नहीं हुए।
Neha Bora Petition Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस याचिका में एक ऐसे नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसमें उन्हें 10,000 रुपये का बॉन्ड भरने का निर्देश दिया गया था।
इस बीच, नेहा बोरा ने कनॉट प्लेस में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने कहा कि वह किसी अन्य संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल नहीं थीं।
सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से तीखे सवाल पूछे और जानना चाहा कि क्या कोई स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) बिना किसी स्वतंत्र जांच के ऐसा नोटिस जारी कर सकता है। इस मामले में कोर्ट का अंतिम फैसला शुक्रवार को आने की उम्मीद है।
दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता नेहा बोरा की चिंता यह है कि उन्हें पहले ही 'बुरा' करार दिया जा चुका है, और अब उनसे यह वादा लिया जा रहा है कि वे आगे अच्छा बर्ताव करेंगी। जब कोई व्यक्ति कोर्ट में आकर सही बर्ताव करने का वादा करता है, तो इसका मतलब यही निकलता है कि अब तक उनका बर्ताव सही नहीं रहा है।
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए ASG चेतन शर्मा ने कहा, "जब नेहा बोरा के खिलाफ छह FIR दर्ज हो चुकी हैं, तो क्या उन्हें पूरी तरह से बेकसूर माना जा सकता है?"
दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह 23 अक्टूबर को 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर आदेश सुनाएगा। नेहा बोरा ने पुलिस के उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने 'शांति' बॉन्ड भरने के लिए कहा गया था।
जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने बोरा और पुलिस के वकीलों की लगभग तीन घंटे तक दलीलें सुनने के बाद याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। जज ने कहा, "मैं कल शाम 6 बजे आदेश सुनाऊंगा।"
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को गुरुवार को राजौरी गार्डन स्थित अपने कार्यालय में बुलाया था, लेकिन दोनों ने दिल्ली पुलिस को ठेंगा दिखा दिया और वे क्राइम ब्रांच के सामने पेश नहीं हुए।
सौरव दास और आशुतोष रांका ने पुलिस से और समय मांगा है, जिसके बाद पुलिस अब उन्हें एक नया नोटिस जारी करेगी। बुधवार को दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने इन दोनों नेताओं को जमानत दे दी थी, जिसके तहत उन्हें 50,000 रुपये का बॉन्ड भरना था।
दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान इन दोनों को हिरासत में लिया था। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका उनसे बेहतर और अधिक प्रमुख नेता हैं।