नेहा बोरा ने CJP से किया किनारा, हाई कोर्ट में कहा- तिरंगा फहराने के लिए अनुमति जरूरी नहीं; कब आएगा फैसला?

Neha Bora: नेहा बोरा ने दिल्ली हाई कोर्ट में CJP के सेंट्रल पार्क प्रदर्शन से खुद को अलग बताया। पुलिस के शांति बॉन्ड नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।
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नेहा बोरासोर्स-IANS
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Highlights

  • नेहा बोरा ने दिल्ली हाई कोर्ट में पुलिस के शांति बॉन्ड नोटिस को चुनौती दी।

  • सुनवाई के दौरान उन्होंने CJP के सेंट्रल पार्क प्रदर्शन से खुद को अलग बताया।

  • हाई कोर्ट ने याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा, शुक्रवार शाम 6 बजे फैसला आ सकता है।

Delhi High Court on Neha Bora Case: दिल्ली हाई कोर्ट में लेफ्ट छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की छात्र नेता नेहा बोरा की याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। नेहा ने दिल्ली पुलिस की ओर से शांति बॉन्ड भरने के लिए जारी नोटिस को चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान उन्होंने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से बुलाए गए प्रदर्शन से खुद को अलग बताया। लंबी सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार शाम 6 बजे फैसला सुनाया जा सकता है।

नेहा बोरा ने CJP प्रदर्शन से खुद को अलग बताया

नेहा बोरा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शंकरनारायणन ने अदालत में स्पष्ट किया कि उनकी मुवक्किल सेंट्रल पार्क में आयोजित प्रदर्शन के आह्वान का हिस्सा नहीं थीं। उन्होंने कहा कि नेहा बोरा का अपना अलग आह्वान था और वह मंडी हाउस में बैठक आयोजित करने से जुड़े मामले को देख रही थीं।

वकील ने कहा, “मैं एक बात साफ करना चाहता हूं कि वह सेंट्रल पार्क में अलग से किए गए आह्वान में शामिल नहीं थीं। उन्हें किसी दूसरे संगठन ने बुलाया था। वह उससे जुड़ी नहीं हैं। वह मंडी हाउस में बैठक करने के अपने आह्वान से निपट रही थीं।”

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'तिरंगा फहराने के लिए अनुमति की जरूरत नहीं'

नेहा बोरा ने दिल्ली हाई कोर्ट में पुलिस के उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के समक्ष शांति बॉन्ड भरने के लिए कहा गया है। उनकी ओर से दलील दी गई कि यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 130 के तहत जारी किया गया है।

नेहा के वकील ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार के कामकाज का विरोध करना जरूरी है। उन्होंने दलील दी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं और नेहा ने कभी मंच से हिंसा के लिए नहीं उकसाया।

वकील के मुताबिक, नेहा के भाषण हमेशा शांतिपूर्ण और संतुलित रहे हैं। उन्होंने सरकार और अन्य अधिकारियों के कामकाज में सुधार की बात कही है। नेहा की ओर से यह भी दलील दी गई कि तिरंगा फहराने के लिए अनुमति की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

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दिल्ली पुलिस ने याचिका की सुनवाई पर उठाई आपत्ति

दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में इस बात पर आपत्ति जताई कि शांति बॉन्ड भरने के नोटिस को चुनौती देने वाली नेहा बोरा की याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं। पुलिस ने उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष बॉन्ड भरने के लिए जारी नोटिस के संदर्भ में अपना पक्ष रखा।

नेहा बोरा ने अदालत से नोटिस रद्द करने और पुलिस को उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश देने की मांग की है।

SIR के खिलाफ किया था प्रदर्शन

नेहा बोरा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में सक्रिय रही हैं। इसी संदर्भ में दिल्ली पुलिस के नोटिस को लेकर उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया। फिलहाल अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। शुक्रवार शाम 6 बजे फैसला सुनाए जाने की संभावना है।

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