Gadchiroli Political News: बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और प्रदेश में लगातार सामने आ रही गंभीर घटनाओं के बावजूद राज्य सरकार जनता की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय विधायकों तथा राजनीतिक दलों में फूट डालकर अपनी सत्ता बचाने में जुटी है। सरकार को राज्य की जनता की समस्याओं और उनके सुख-दुःख से कोई सरोकार नहीं है। यह तीखा आरोप राकां (शरदचंद्र पवार) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने लगाया।
वह राकां द्वारा आयोजित कार्यकर्ता संवाद सम्मेलन के अवसर पर गड़चिरोली में आयोजित पत्रकार वार्ता में बोल रहे थे। इस अवसर पर पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख, प्रदेश सचिव हिराचंद बोरकुटे, एड। संजय ठाकरे, जिलाध्यक्ष अतुल गण्यारपवार, शेमदेव चाफले समेत विभिन्न आघाड़ियों के प्रमुख पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।
शशिकांत शिंदे ने कहा कि, गडचिरोली जिले में आश्रमशाला की तीन छात्राओं की जमीन पर सोने के कारण मृत्यु हो जाती है। मुख्यमंत्री द्वारा तीन वर्ष पहले उद्घाटित किया गया पुल ढह जाता है। स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही के चलते प्रसव के बाद मां और नवजात की मौत हो जाती है।
सिरोंचा तहसील में गलत इंजेक्शन लगाए जाने से चार वर्षीय बच्चे की मौत हो जाती है। खराब सड़कों के कारण लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं और यातायात व्यवस्था भी चरमरा गई है। उन्होंने कहा कि, अमरावती में तीन मरीजों की जलने से मौत जैसी गंभीर घटनाओं सहित महाराष्ट्र में घटनाओं की लंबी श्रृंखला जारी है। इसके बावजूद सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय सत्ता बचाने के लिए राजनीतिक जोड़तोड़ में लगी हुई है।
पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने मांग की कि, उनके खिलाफ लगाए गए 100 करोड रुपये की कथित वसूली के आरोपों की जांच के लिए गठित न्यायमूर्ति चादिवाल आयोग की रिपोर्ट राज्य सरकार तत्काल सार्वजनिक करें। देशमुख ने कहा कि, जब वह राज्य के गृहमंत्री थे, तब पुलिस विभाग से 100 करोड़ रुपये की वसूली का आरोप लगाकर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इसके चलते उन्हें गृहमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा।
उन्होंने उस समय पूरे मामले की स्वतंत्र आयोग के माध्यम से जांच कराने की मांग की थी। राज्य सरकार ने उनकी मांग स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति चांदिवाल की अध्यक्षता में स्वतंत्र आयोग गठित किया था। देशमुख के अनुसार, आयोग ने करीब ढाई वर्ष पहले लगभग 1,400 पृष्ठों की विस्तृत जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है, लेकिन सरकार अब तक इसे सार्वजनिक नहीं कर रही है।