Gadchiroli Medical College Administrative Change: काफी संघर्ष के बाद और अनेक वर्षों की मांग के बाद गड़चिरोली में सरकारी मेडिकल कॉलेज शुरू हुआ। लेकिन स्थापना से लेकर ही प्रशासकीय बदलाव, विवाद और कार्यप्रणाली से निर्माण होनेवाले प्रश्नों के चलते यह संस्था निरंतर चर्चा में है। प्रभारी अधिष्ठाता डॉ. टेकाड़े के विवादित कार्यप्रणाली के चलते उन्हें पद से हटाकर उनकी जगह पर कुछ दिन पहले डॉ. राजेंद्र सुरपाम को विराजमान किया गया।
लेकिन अब डॉ. सुरपाम को अधिष्ठाता पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी से मुक्त किया गया है। जिससे मेडिकल कॉलेज के प्रशासन में फिर एक बड़ा बदलाव हुआ है। राज्य सरकार के वैद्यकीय शिक्षा विभाग ने 10 सितंबर को जारी किए आदेश नुसार, गड़चिरोली के सरकारी मेडीकल कॉलेज का अतिरिक्त कार्यभार डॉ. राजेंद्र सुरपाम के पास से निकालकर नागपुर के इंदिर गांधी सरकारी वैद्यकीय महाविद्यालय के अस्थिव्यंगोपचारशाख विभाग के प्राध्यापक डॉ. मोहम्मद फैजल अ. सलीम क आगामी आदेश तक सौंपा गया है।
डॉ. सुरपास को इतनी जल्दी क्यो हटाया गया इस संदर्भ में सरकारी आदेश में किसी भी तरह का उल्लेख नहीं है। डॉ. सुरपाम के कार्यप्रणाली संदर्भ में कुछ शिकायतें अथवा प्रशासकीय कारणों के चलते यह बदलाव हुआ क्या? ऐसा प्रश्न उपस्थित किया जा रहा है। लेकिन इस संदर्भ में अधिकृत कारण सामने नहीं आया है। लेकिन इस बदलाव को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं हो रही है।
गड़चिरोली जैसे दुर्गम और आदिवासी बहुल जिले में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध हो, स्थानीय छात्रों को मेडीकल शिक्षा का अवसर मिले और जिले के नागरिकों को उपचार के लिए बड़े शहरों में न जाना पड़े, इस उद्देश्य से सरकारी मेडीकल कॉलेज के लिए काफी संघर्ष हुआ। जिससे इस संस्था से जिलावासियों की काफी उम्मीद है। लेकिन पिछले कुछ अवधि में प्रशासकीय हलचल के मद्देनजर वैद्यकीय महाविद्यालय का मुख्य उद्देश्य दूर होकर अधिकारी और प्रशासन का अंतर्गत संघर्ष, आरोप-प्रत्यारोप और अन्य प्रशासकीय मुद्दों को अधिक महत्व दिया जा रहा है।
इससे पहले महाविद्यालय के विकासकार्य, बुनियादी सुविधाओं की कमी और कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्न निर्माण हुए थे। 28 करोड़ के विकासकार्यों में अनियिमितता और घटिया दर्जे के कार्य संदर्भ में शिकायत होने के बाद जिलाधिश अविश्यांत पंडा ने निरीक्षण कर जांच का आदेश देने का मामला भी सामने आया था। ऐसे में अब दोबारा प्रभारी अधिष्ठाता जिम्मेदारी बदले जाने से जनप्रतिनिधि और प्रशासन को संस्था के कामकाज संदर्भ में स्पष्टीकरण देने पड़ने की संभावना है।