Gadchiroli Child Nutrition Program: गड़चिरोली जिले के दुर्गम एवं ग्रामीण क्षेत्रों में माताओं, शिशुओं और छोटे बच्चों के पोषण में सुधार तथा कुपोषण की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन और व्हील्स ग्लोबल फाउंडेशन इंडिया के बीच समझौता हुआ है। इसके तहत अगले तीन वर्षों तक 'मदर, इन्फंट एंड यंग चाइल्ड न्यूट्रिशन' (MIYCN) प्रशिक्षण एवं जनजागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसके माध्यम से स्वास्थ्य कर्मचारियों और आंगनवाड़ी सेविकाओं को पोषण संबंधी परामर्श एवं व्यावहारिक कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा और व्हील्स ग्लोबल फाउंडेशन इंडिया के अध्यक्ष किशन गोएंका ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गाड़े, सहायक जिलाधिकारी तथा एकात्मिक आदिवासी विकास परियोजना के परियोजना अधिकारी अरुण एम., जिला नियोजन अधिकारी प्रसाद घाड़गे, जिला शल्य चिकित्सक डॉ. रवि गावंडे, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रताप शिंदे तथा बाल विकास परियोजना अधिकारी दीपक बनाइत प्रमुख रूप से उपस्थित थे। दुर्गम क्षेत्रों की माताओं तक स्तनपान और पोषण संबंधी वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने के लिए सबसे पहले उनके मन में विश्वास पैदा करना जरूरी है।
इस अभियान के सफल क्रियान्वयन में स्वास्थ्य कर्मचारियों और आंगनवाड़ी सेविकाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। प्रारंभिक कठिनाइयों को दूर करते हुए जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गाडे के नेतृत्व में स्वास्थ्य एवं आंगनवाड़ी तंत्र यह जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभाएगा।
व्हील्स ग्लोबल फाउंडेशन के अध्यक्ष किशन गोएंका ने बताया कि, नंदुरबार और नासिक में संचालित परियोजनाओं के अनुभवों का उपयोग करते हुए गड़चिरोली में स्थानीय प्रशिक्षण क्षमता विकसित की जाएगी। करीब 250 कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर उनमें से 50 प्रमुख प्रशिक्षक तैयार करने की योजना है। दुर्गम क्षेत्रों में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की सीमाओं को देखते हुए प्रशिक्षण वीडियो ऑफलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस अभियान के लिए आईआईटी मुंबई द्वारा विकसित 'हेल्थ स्पोकन ट्यूटोरियल्स' का उपयोग किया जाएगा। एड्युपिरामि एज्युकेशनल सर्विसेज के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किया जाएगा। करीब 10 मिनट के ये दृक-श्राव्य वीडियो मराठी सहित 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं, और इन्हें इंटरनेट के बिना भी देखा जा सकता है। इससे दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों को मोबाइल के माध्यम से प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध हो सकेगी। प्रशिक्षण के बाद विशेषज्ञ कर्मचारियों के कौशल का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर आवश्यक सुधार के सुझाव देंगे।
साथ ही प्रशिक्षण के विभिन्न चरणों में माताओं और बच्चों का एक से तीन महीने तक फॉलोअप करने का भी प्रावधान है। आईआईटी मुंबई के स्पोकन ट्युटोरियल उपक्रम के प्रमुख प्रा. कण्णन मौगल्य ने प्रशिक्षण पद्धति की जानकारी दी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि, इस पहल से माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी। समझौते के अनुसार फाउंडेशन द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं के लिए जिला प्रशासन को किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना होगा।