Gadchiroli Animal Husbandry Department: विकास की बातें, दुर्गम जिलों के लिए विशेष योजनाएं तथा प्रशासन को अधिक सक्षम बनाने की घोषणाएं लगातार की जा रही हैं, लेकिन गड़चिरोली जिले में पशुसंवर्धन व दुग्ध व्यवसाय विभाग की स्थिति बेहद चिंताजनक है। 30 जून 2025 की स्थिति के अनुसार विभाग में स्वीकृत 491 पदों में से 255 पद रिक्त हैं, जबकि केवल 236 अधिकारी व कर्मचारी कार्यरत हैं। जिले में 20वीं पशुगणना के अनुसार करीब 4 लाख 58 हजार 984 पशुधन है। ऐसे में स्वीकृत पदों में से लगभग 50 प्रतिशत पद रिक्त होने के कारण उपलब्ध कर्मचारियों पर पशुधन की देखभाल की बड़ी जिम्मेदारी है।
किसानों के पशुधन की स्वास्थ्य संबंधी देखभाल के लिए सरकार ने पशुसंवर्धन विभाग का गठन किया है। विभाग में पशुधन विकास अधिकारी, सहायक पशुधन विकास अधिकारी, सहायक आयुक्त, प्रशासनिक अधिकारी, कनिष्ठ लिपिक, प्रयोगशाला सहायक, परिचर और सफाईकर्मी सहित कई महत्वपूर्ण पद स्वीकृत किए गए हैं। जिले में कुल 491 पदों को मंजूरी प्राप्त है, लेकिन इनमें से केवल 236 अधिकारी तथा कर्मचारी ही सेवाएं दे रहे हैं।
बारिश के मौसम में पशुओं में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में विभाग में पर्याप्त मनुष्यबल का अभाव गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है। सीमित कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्यभार संभालते हुए दुर्गम एवं दूरदराज के गांवों तक पहुंचकर किसानों और पशुपालकों को सेवाएं देनी पड़ रही हैं। जिले में 2 लाख 44 हजार 439 गाय, बैल और भैंस हैं। वहीं बकरियों एवं भेड़ों की संख्या करीब 1 लाख 94 हजार 717, अन्य पशुओं की संख्या 10 हजार 800 तथा मुर्गियों की संख्या करीब 1 लाख 16 हजार है। इतने बड़े पशुधन की देखभाल की जिम्मेदारी बेहद सीमित मनुष्यबल पर है।
गड़चिरोली जिले को 2 पालकमंत्री होने के बावजूद किसानों और पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण पशुसंवर्धन विभाग में बड़ी संख्या में पद रिक्त होने पर आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है। संवेदनशील, दुर्गम और आदिवासीबहुल जिले में पशुसंवर्धन विभाग को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी सीमित मनुष्यबल के बावजूद अतिरिक्त कार्यभार संभालकर पशुपालकों तक सेवाएं पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए सरकार को तत्काल सभी रिक्त पदों को भरकर आवश्यक मनुष्यबल उपलब्ध कराना चाहिए, ऐसी मांग किसान, पशुपालक और नागरिकों द्वारा की जा रही है। विकास की घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित न रहकर उनका लाभ जमीनी स्तर पर किसानों और पशुपालकों तक पहुंचना चाहिए।