El Nino Impact On Maharashtra: देश के विकास और औद्योगिक प्रगति का इंजन कहे जाने वाले महाराष्ट्र पर इस साल भी सूखे का संकट मंडरा रहा है। राज्य के 36 में से 20 जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश होने से कई इलाकों में किसानों की खड़ी फसलें सूखे की चपेट में हैं। कई जिलों में किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं।
सबसे गंभीर तस्वीर मराठवाड़ा से सामने आ रही है। क्षेत्र के 8 जिलों में 20 सितंबर तक बारिश सामान्य के मुकाबले महज 60 से 65 फीसदी रही और जलाशयों में पानी का भंडार करीब 50 फीसदी तक सिमट गया है। लंबे शुष्क दौर ने सोयाबीन, कपास, मक्का, तुअर और मूंग जैसी फसलों को प्रभावित किया है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कई हिस्सों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान हुआ है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून सीजन में राज्य को औसत 866.4 मिमी के मुकाबले करीब 632.5 मिमी बारिश मिली है, यानी लगभग 27 फीसदी की कमी है। कई तालुकों में तो 30 दिन से अधिक समय तक बारिश नहीं हुई, जिसका सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ा है।
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री व धाराशिव के पालकमंत्री प्रताप सरनाईक किसानों के बीच पहुंचे तो फसलों की स्थिति देखकर चिंता जताई। सरनाईक ने खेत में से ही राज्य के उपमुख्यंत्री एकनाथ शिंदे को वीडियो कॉल कर स्थिति की जानकारी देते हुए परेशान किसानों से बात कराई। डिप्टी सीएम शिंदे ने किसानों को सरकार की ओर से हर सम्भव मदद का भरोसा दिलाया। मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि सबसे ज्यादा खराब हालत मराठवाडा इलाके की है। यहां अलनीनो का सर्वाधिक असर हुआ है।
किसानों के लिए संकट केवल फसल तक सीमित नहीं है। कम उत्पादन का मतलब आय में गिरावट, कर्ज चुकाने में कठिनाई और परिवार के खर्च का दबाव भी है। मराठवाड़ा में कम बारिश के कारण चारे और पेयजल की कमी से किसानों की उम्मीदें भी सूखती नजर आ रहीं हैं। कुछ इलाकों से रोजमर्रा की जरूरतों और रोजगार की तलाश में ग्रामीणों के पलायन की स्थिति बन गई है।
इन संकटों के बीच राज्य में सूखाग्रस्त किसानों की आत्महत्या की घटनाएं बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सकपाल ने राज्य के किसानों को प्रति हेक्टेयर 1 लाख की तत्काल सहायता एवं पूरा कर्ज माफ करने की मांग की है।
महाराष्ट्र सरकार ने जून 2026 में करीब 55.72 लाख किसानों को लाभ पहुंचाने वाली 36,585 करोड़ रुपए की कर्जमाफी योजना को मंजूरी दी थी। योजना में पात्र किसानों के 2 लाख रुपए तक के फसल ऋण को माफ करने का प्रावधान है। लेकिन मौजूदा सूखे जैसे हालात में किसानों की मांग केवल कर्जमाफी तक सीमित नहीं है। फसल नुकसान का तत्काल आकलन, मुआवजा, पीने का पानी, पशुओं के लिए चारा और अगली फसल के लिए आर्थिक सहायता भी उतनी ही जरूरी है।
अब गांवों को घोषणाओं से ज्यादा पानी, चारा, फसल सहायता और समय पर मुआवजे की जरूरत है। महाराष्ट्र के खेतों में खड़ी फसल सिर्फ किसान की कमाई नहीं है, बल्कि वह पूरे ग्रामीण परिवार की सांस है। सवाल यही है कि राहत उस सांस के थमने से पहले पहुंचती है या नहीं।
मौसम की अनिश्चितता ने सबकी चिंता और बढ़ा दी है। विशेषज्ञ और सरकारी एजेंसियां अल नीनो जैसी जलवायु परिस्थितियों के संभावित प्रभाव पर लगातार नजर रख रही हैं। केंद्र सरकार ने भी महाराष्ट्र समेत कृषि पर अल नीनो के संभावित प्रभाव की निगरानी के लिए मौसम और कृषि संस्थाओं के साथ समन्वय की जानकारी दी है।
सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत, पेयजल व्यवस्था और फसल नुकसान के आकलन के निर्देश दिए हैं। आधिकारिक नुकसान आकलन की प्रक्रिया 5 अक्टूबर से शुरू होनी है, लेकिन राज्य सरकार ने उससे पहले ही प्रभावित किसानों तक सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।