

Mumbai Ahmedabad Bullet Train Route And Fare: भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना ने अब अपनी रफ्तार पकड़ ली है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का करीब 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। भारतीय रेलवे और नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) इस रूट पर यात्रियों की सुविधा और जरूरत को ध्यान में रखते हुए दो अलग-अलग कैटेगरी की बुलेट ट्रेनें चलाने जा रहा है 'रैपिड बुलेट ट्रेन' और 'लोकल बुलेट ट्रेन'।
जापान से 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली शिंकानसेन बुलेट ट्रेन मिलने में हो रही देरी को देखते हुए भारत ने अब स्वदेशी स्तर पर भी तैयारी शुरू कर दी है। देश में 350 किमी/घंटे की स्पीड वाली 'E10 मेड इन इंडिया बुलेट ट्रेन' बनाने की योजना है, जो 2030 तक पटरी पर उतर सकती है। वहीं, शुरुआती ट्रायल के लिए भारतीय रेलवे और BEML मिलकर स्वदेशी B28 कोच वाले 8-कोच के ट्रेनसेट तैयार कर रहे हैं।
रेलवे के अनुसार 2027 में इसके पहले चरण पर हाई स्पीड रेल सेवा शुरू करने का लक्ष्य है। 508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर 12 स्टेशन होंगे। यह रूट महाराष्ट्र, गुजरात तथा दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगा।
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत मास्ट लगाने और बिजली से जुड़े काम तेजी से किए जा रहे हैं। बुलेट ट्रेन के संचालन के लिए जरूरी सिस्टम रूट के साथ-साथ आकार ले रहे हैं और अब तक 9,200 से ज्यादा OHE मास्ट लगाए जा चुके हैं।
रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जुलाई 2026 में कहा था कि परियोजना का करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और 2027 में सूरत-बिलिमोरा सेक्शन से पहला चरण शुरू करने का लक्ष्य है। इसके बाद सेवा को वलसाड-वापी, अहमदाबाद और आगे मुंबई की दिशा में चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने की योजना है।
रेल मंत्रालय के एक अन्य आधिकारिक अपडेट में पहले चरण के लिए सूरत-वापी सेक्शन का भी उल्लेख किया गया है। इसलिए अंतिम वाणिज्यिक सेक्शन और सेवा शुरू होने की तारीख को रेलवे के अंतिम परिचालन कार्यक्रम के आधार पर ही माना जाना चाहिए।
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के शुरुआती परिचालन मॉडल में दो तरह की सेवाओं की योजना रही है।
इस सेवा में कम स्टेशनों पर स्टॉजेप होंगे। प्रस्तावित पैटर्न के अनुसार यह साबरमती, वडोदरा, सूरत और मुंबई BKC जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रुक सकती है। इसका उद्देश्य मुंबई और अहमदाबाद के बीच बड़े कारोबारी केंद्रों को तेजी से जोड़ना है। पुराने परियोजना दस्तावेजों में सीमित-स्टॉप यात्रा का समय करीब 2 घंटे 7 मिनट बताया गया था।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन दूसरे चरण में सभी 12 स्टेशनों पर रुकेगी।
मुंबई BKC
ठाणे
विरार
बोईसर
वापी
बिलिमोरा
सूरत
भरूच
वडोदरा
आनंद
अहमदाबाद
साबरमती
इस सेवा से वापी, भरूच, विरार और ठाणे जैसे औद्योगिक एवं शहरी क्षेत्रों को हाई स्पीड रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। पुराने आधिकारिक परियोजना दस्तावेजों में ऑल-स्टॉप यात्रा का समय करीब 2 घंटे 58 मिनट बताया गया था।
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर की ट्रेनों की डिजाइन स्पीड 350 किमी प्रति घंटा और अधिकतम ऑपरेशनल स्पीड 320 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है। पूरे 508 किमी कॉरिडोर पर मुंबई-अहमदाबाद यात्रा का समय करीब दो घंटे के आसपास रखने की योजना है।
हालांकि शुरुआती स्वदेशी B28 ट्रेनसेट की डिजाइन स्पीड 280 किमी प्रति घंटा और ऑपरेशनल स्पीड करीब 250 किमी प्रति घंटा बताई गई है। इसका प्रोटोटाइप BEML द्वारा तैयार किया जा रहा है और 2027 में परीक्षण की तैयारी है।
जापान की अगली पीढ़ी की E10 Shinkansen ट्रेन अभी विकास के चरण में है। भारत-जापान के बीच मौजूदा योजना के अनुसार E10 को 2030 के शुरुआती वर्षों में मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर लाया जा सकता है।
इस बीच भारत ने अपनी हाई स्पीड ट्रेन तकनीक विकसित करने पर काम तेज किया है। BEML और भारतीय रेलवे 8-कोच वाले B28 प्रोटोटाइप पर काम कर रहे हैं। इसके बाद भारत B35 नाम से 350 किमी प्रति घंटे डिजाइन स्पीड वाली स्वदेशी हाई स्पीड ट्रेन बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जिसका लक्ष्य 2030 के आसपास रखा गया है।
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना की शुरुआती अनुमानित लागत करीब 1.1 लाख करोड़ रुपए थी। बाद में लागत बढ़कर करीब 1.98 लाख करोड़ रुपए के स्तर तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है। लागत में वृद्धि के पीछे परियोजना की समयसीमा, निर्माण लागत और अन्य खर्चों में बदलाव जैसे कारक बताए गए हैं।
शुरुआती अनुमानों में मुंबई-अहमदाबाद यात्रा के लिए इकोनॉमी क्लास का किराया करीब 3,000 रुपए और बिजनेस क्लास का करीब 4,000-4,500 रुपए बताया गया था। लागत बढ़ने के बाद 6,000-7,000 रुपए किराये की चर्चा हुई, लेकिन नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इन अटकलों को आधारहीन बताते हुए खारिज किया और कहा कि किराया किफायती रखा जाएगा। इसलिए फिलहाल 6,000-7,000 रुपए को आधिकारिक किराया नहीं माना जा सकता।
परियोजना के शुरुआती परिचालन मॉडल में 10-कोच ट्रेनसेट में करीब 750 यात्रियों की क्षमता और भविष्य में 16-कोच ट्रेनसेट में करीब 1,250 यात्रियों की क्षमता बढ़ाने की योजना बताई गई थी। हालिया रिपोर्टों में भी 16-कोच ट्रेन के लिए करीब 1,250-1,300 यात्रियों की क्षमता का अनुमान दिया गया है।