असदुद्दीन ओवैसी (इमेज-सोशल मीडिया) 
महाराष्ट्र

कांग्रेस ने लाया मुसलमानों-दलितों के खिलाफ कानून, ओवैसी ने खालिद और इमाम को जमानत न मिलने पर खोला राज

Asaduddin Owaisi Statement: ओवैसी ने कहा कि तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम ने यूएपीए पेश किया था। इसका संसद में विरोध करने वाले वे अकेले व्यक्ति थे। आज यह कानून निर्दोष लोगों की जिंदगियां तबाह कर रहा।

रंजन कुमार

Asaduddin Owaisi News: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं मिलने के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि जिस कड़े यूएपीए के तहत उमर खालिद और शरजील इमाम पर मामला दर्ज किया गया है, उसे कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में लागू किया गया था। हैदराबाद के सांसद नगर निगम चुनावों से पहले महाराष्ट्र के अमरावती अंतर्गत चांदनी चौक इलाके में जनसभा में बोल रहे थे।

ओवैसी ने कहा कि चुनाव के दौरान धर्मनिरपेक्षता की बात करने वाले लोग वास्तव में मुसलमानों, दलितों और आदिवासियों के दुश्मन हैं, क्योंकि वे वोट पाने के लिए राजनीतिक धर्मनिरपेक्षता का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि खालिद और इमाम को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 15ए के आधार पर 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया था।

चिदंबरम ने किया था UAPA को पेश

इस दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने यह भी कहा कि तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम ने (कांग्रेस सरकार के दौरान) यूएपीए (UAPA) पेश किया था। संसद में इसका विरोध करने वाले वे (ओवैसी) इकलौते व्यक्ति थे। मैंने सबसे पहले कहा था कि इस कानून का इस्तेमाल पुलिस मुसलमानों, आदिवासियों, दलितों और उन बुद्धिजीवियों के खिलाफ करेगी, जो सरकार की नीतियों को समझकर उनका विरोध करते हैं। आज जो हुआ, वो आप देख ही सकते हैं। इन दोनों बच्चों को उस कानून में आतंकवाद की परिभाषा के कारण जमानत नहीं मिल सकी।

2019 में यूएपीए में संशोधन का समर्थन

ओवैसी ने कहा कि खालिद और इमाम 5 साल से जेल में सड़ रहे हैं। वहीं, एल्गर परिषद मामले में आरोपी 85 वर्षीय स्टेन स्वामी की इसी कानून के कारण जेल में मौत हो गई। उन्होंने कहा कि 2019 में जब यूएपीए में संशोधन किया गया था, तब कांग्रेस ने भाजपा सरकार का समर्थन किया था, जो अब निर्दोष लोगों की जिंदगियां तबाह कर रहा। सुप्रीम कोर्ट ने इसी हफ्ते 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी, लेकिन भागीदारी के क्रम का हवाला देते हुए पांच अन्य लोगों को जमानत दे दी थी।

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