Tukaram Mundhe MPSC Chairman: MPSC परीक्षा और पेपर लीक मामले को लेकर सियासत और प्रतियोगी छात्रों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। MPSC द्वारा आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर पद की परीक्षा का पेपर लीक होने की खबर सामने आने के बाद राज्य भर के अभ्यर्थियों में हड़कंप मच गया है।
इस बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरदचंद्र पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने एक बड़ा और सनसनीखेज दावा करते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को MPSC का नया अध्यक्ष बनाने की पुरजोर वकालत की है।
छत्रपति संभाजीनगर में छात्रों द्वारा निकाले गए विशाल विरोध मोर्चे में शामिल होकर विधायक रोहित पवार ने सरकार पर सीधा हमला बोला। रोहित पवार ने दावा किया कि उन्होंने MPSC आयोग के अध्यक्ष पद के लिए तय सभी नियमों और पात्रता शर्तों की गहन जांच-पड़ताल की है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, मैंने सब कुछ चेक कर लिया है। नियमावली और शर्तों के अनुसार वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे पूरी तरह से MPSC के नए अध्यक्ष बन सकते हैं। रोहित पवार का मानना है कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए तुकाराम मुंढे जैसे सख्त और ईमानदार अधिकारी को ही MPSC की कमान सौंपी जानी चाहिए।
छात्रों के आंदोलन के बीच रोहित पवार ने MPSC के वर्तमान अध्यक्ष विवेक भीमनवार को तुरंत पद से हटाने और उनके इस्तीफे की मांग उठाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विवेक भीमनवार का पिछला कार्यकाल भी बेहद विवादित रहा है। रोहित पवार के अनुसार, जब भीमनवार RTO में आयुक्त के रूप में कार्यरत थे, तब वहां भारी गड़बड़ियां और भ्रष्टाचार हुआ था।
उन्होंने आरोप लगाया कि RTO का वही भ्रष्टाचार का चक्र अब MPSC में भी शुरू हो गया है। रोहित पवार ने दावा किया कि उनके पास इसके ठोस सबूत मौजूद हैं, जिन्हें उन्होंने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भी सौंपा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस विवादित अध्यक्ष पर कार्रवाई नहीं करती है, तो यह माना जाएगा कि मुख्यमंत्री अपने मित्र को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
सड़कों पर उतरे हजारों छात्रों के आक्रोश का समर्थन करते हुए रोहित पवार ने कहा कि बार-बार पेपर लीक होना, परीक्षाएं टलना और ऑनलाइन परीक्षाओं में टेंडर घोटाले जैसे गंभीर मुद्दों से राज्य का युवा परेशान है।
उन्होंने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि राज्य भर के छात्र न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन सरकार एक शब्द भी बोलने को तैयार नहीं है। यदि सरकार ने युवाओं की अनदेखी की, तो यह आक्रोश और भड़केगा तथा युवा सरकार को चैन से बैठने नहीं देंगे।
प्रशासनिक सुधार और अपनी सख्त कार्यशैली के लिए चर्चित IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को लेकर इस तरह की मांग पहली बार नहीं उठी है। इससे पहले भी सामाजिक स्तर पर यह मांग जोर-शोर से उठी थी कि तुकाराम मुंढे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए।
पिछले माह मराठी एकीकरण समिति और आम्ही गिरगावकर नामक सामाजिक संगठनों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को इस संबंध में एक पत्र भेजा था, जिसमें राज्य के प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता और कसावट लाने के लिए तुकाराम मुंढे को मुख्यमंत्री बनाने या बड़ी जिम्मेदारी सौंपने का आग्रह किया गया था।