Bombay High Court Aurangabad Bench On Sunil Tatkare Appointment: उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे की नियुक्ति को लेकर दाखिल शिकायत पर चुनाव आयोग को चार माह के भीतर निर्णय लेना होगा। बंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ के न्यायमूर्ति नितिन सूर्यवंशी और न्यायमूर्ति आबासाहेब शिंदे ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को यह निर्देश दिया।
जालना जिले की परतूर-मंठा विधानसभा क्षेत्र के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष भाऊसाहेब गोरे ने अधिवक्ता राजेंद्र डासालकर के माध्यम से सुनील तटकरे की नियुक्ति को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ में याचिका दाखिल की थी। याचिका में दावा किया गया है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संविधान में निर्धारित चुनाव प्रक्रिया का पालन किए बिना सुनील तटकरे की नियुक्ति की गई है।
याचिकाकर्ता ने इस मामले में 8 अगस्त 2026 को केंद्रीय चुनाव आयोग के समक्ष विस्तृत शिकायत दाखिल की थी। शिकायत पर अब तक हुई कार्रवाई को लेकर खंडपीठ ने चुनाव आयोग से उसका पक्ष पूछा।
चुनाव आयोग की ओर से अधिवक्ता आलोक शर्मा ने न्यायालय को बताया कि आयोग के निर्देश के अनुसार याचिकाकर्ता की शिकायत पर चार माह के भीतर निर्णय लिया जाएगा। आयोग की ओर से दिए गए इस आश्वासन के बाद खंडपीठ ने संबंधित निर्देश जारी करते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।
मामले में अब चुनाव आयोग को याचिकाकर्ता की शिकायत पर निर्धारित अवधि में निर्णय लेना होगा। नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय चुनाव आयोग द्वारा किया जाएगा।
भाऊसाहेब गोरे ने आरोप लगाया है कि 3 जुलाई 2023 को सुनील तटकरे को महाराष्ट्र एनसीपी का प्रदेशाध्यक्ष बनाने का ऐलान पूरी तरह से एकतरफा था। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के संविधान के अनुसार, राज्य समिति के सदस्यों द्वारा पारदर्शी एवं लोकतांत्रिक तरीके से संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया के जरिए अध्यक्ष का चयन किया जाना अनिवार्य है।
शिकायतकर्ता भाऊराव गोरे ने सुनील तटकरे के कार्यकाल की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। गोरे के मुताबिक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संविधान के तहत प्रदेशाध्यक्ष का सामान्य कार्यकाल तीन साल का होता है, जो जुलाई 2026 में समाप्त हो चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कार्यकाल पूरा हो चुका है और नई संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई है, तो सुनील तटकरे किस आधार पर अब भी प्रदेशाध्यक्ष के पद पर आसीन हैं?