Chhatrapati Sambhajinagar Industrial Zone: पुणे के पास चाकण औद्योगिक क्षेत्र में तेजी से बढ़ते उद्योगों के साथ पैदा हुई यातायात और बुनियादी सुविधाओं की समस्या छत्रपति संभाजीनगर के लिए बड़ी चेतावनी है। सड़कें कमजोर पड़ें, भारी वाहनों की संख्या बढ़े, यातायात जाम रोज की समस्या बन जाए और नागरिक सुविधाएं उद्योगों की रफ्तार का साथ न दे पाएं, तो औद्योगिक विकास भी परेशानी में बदल सकता है। शेंद्रा-बिडकीन में जिस औद्योगिक क्रांति की नींव रखी जा रही है, उसके साथ ऐसी स्थिति पैदा न हो, इसके लिए उद्योग आने से पहले ही बुनियादी सुविधाओं का मजबूत ढांचा तैयार करना होगा।
शेंद्रा-बिडकीन क्षेत्र छत्रपति संभाजीनगर की औद्योगिक तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है। बड़े उद्योगों के साथ उनके सहायक उद्योग, कलपुर्जा निर्माण इकाइयां, भंडारण केंद्र, माल परिवहन और सेवा क्षेत्र विकसित होंगे। टोयोटा, एथर, जेएसडब्ल्यू, महिंद्रा और पिरामल जैसी कंपनियों के साथ प्रथम और द्वितीय स्तर के आपूर्तिकर्ताओं का जाल बनने की संभावना है। इससे बड़ी संख्या में रोजगार पैदा होंगे और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
लेकिन उद्योगों की संख्या बढ़ने के साथ सड़कों पर दबाव भी तेजी से बढ़ेगा। हजारों कामगार रोजाना औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंचेंगे। कंटेनर, ट्रक और दूसरे भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ेगी। कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर तैयार माल की ढुलाई तक परिवहन व्यवस्था पर भारी दबाव आएगा। यदि इसकी तैयारी पहले से नहीं की गई तो कुछ वर्षों बाद शेंद्रा-बिडकीन में भी वही तस्वीर दिखाई दे सकती है, जो आज चाकण में नजर आ रही है।
शेंद्रा से करमाड और जालना की दिशा में प्रस्तावित 60 मीटर चौड़े मार्ग को पूरी क्षमता के साथ विकसित करना समय की जरूरत है। बिडकीन के लिए भी पर्याप्त चौड़ाई वाले मजबूत और सुचारु सड़क नेटवर्क की आवश्यकता है। औद्योगिक वाहनों और शहर के सामान्य यातायात को एक ही सड़क पर निर्भर रखने के बजाय यातायात के अलग-अलग प्रवाह की व्यवस्था करनी होगी।
चितेगांव और बिडकीन के गांवों से होकर भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। धूल, शोर और यातायात जाम से स्थानीय आबादी भी प्रभावित होगी। इसलिए गांवों के बीच से भारी वाहनों को निकालने के बजाय पहले से उपयुक्त बाईपास मार्ग तैयार करने होंगे।
राष्ट्रीय राजमार्ग 52 पर सोलापुर-धुलिया बाईपास को बिडकीन और औरिक के दूसरे चरण से जोड़ने वाला उच्च क्षमता का नया मार्ग भी भविष्य की जरूरतों को देखते हुए महत्वपूर्ण होगा। इससे औद्योगिक वाहनों को शहर के भीतरी हिस्सों में प्रवेश करने से बचाया जा सकेगा और माल परिवहन का समय भी कम होगा।
औरिक के विस्तार के लिए करीब 8 हजार एकड़ और बिडकीन क्षेत्र में महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल के माध्यम से करीब 5 हजार एकड़ अतिरिक्त भूमि औद्योगिक विकास के लिए उपलब्ध होने की संभावना है। इतनी बड़ी भूमि पर उद्योग विकसित होने का अर्थ केवल कारखानों का निर्माण नहीं है। इसके साथ एक नया आर्थिक और नागरिक क्षेत्र भी विकसित होगा।
औद्योगिक क्षेत्र के आसपास आवासीय बस्तियां बढ़ेंगी। कामगारों के लिए आवास, स्कूल, अस्पताल, बाजार और अन्य नागरिक सुविधाओं की मांग बढ़ेगी। पानी की जरूरत बढ़ेगी और जल निकासी व्यवस्था पर भी दबाव आएगा। इसलिए औद्योगिक क्षेत्र और उसके आसपास का विकास एक साथ करना होगा।
शहर की सीमा से लगे इन क्षेत्रों का विकास अलग-अलग परियोजनाओं के रूप में करने के बजाय समूह आधारित योजना के तहत किया जाना चाहिए। सड़क, पानी, जल निकासी, सार्वजनिक परिवहन, माल परिवहन, भंडारण, आवास और अन्य नागरिक सुविधाओं को एक ही व्यापक योजना का हिस्सा बनाना होगा।
औद्योगिक विस्तार के साथ पानी की मांग तेजी से बढ़ना तय है। उद्योगों के अलावा कामगारों और नई आबादी के लिए भी पर्याप्त पानी चाहिए होगा। इसलिए भविष्य की मांग का आकलन करते हुए जलापूर्ति का दीर्घकालीन ढांचा तैयार करना जरूरी है।
इसी तरह बारिश के पानी की निकासी को भी अभी से प्राथमिकता देनी होगी। बड़े पैमाने पर निर्माण होने से प्राकृतिक जल प्रवाह प्रभावित होगा। यदि नालों और जल निकासी मार्गों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हुई तो भारी बारिश में जलभराव की समस्या सामने आ सकती है। जल निकासी, वर्षा जल संचयन और प्राकृतिक जल प्रवाह को ध्यान में रखकर विकास योजना तैयार करनी होगी।
औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले हजारों लोग यदि निजी वाहनों से आने-जाने लगे तो सड़कों पर दबाव कई गुना बढ़ सकता है। इसलिए शेंद्रा-बिडकीन को छत्रपति संभाजीनगर शहर से जोड़ने वाली मजबूत सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था जरूरी है।
कामगारों के लिए नियमित बस सेवा, प्रमुख मार्गों पर सुरक्षित यातायात व्यवस्था और औद्योगिक क्षेत्र के भीतर संपर्क मार्ग विकसित करने होंगे। भविष्य में माल परिवहन और अन्य परिवहन साधनों को एक-दूसरे से जोड़ने की योजना भी बनाई जानी चाहिए। उद्योग आने के बाद परिवहन व्यवस्था खड़ी करने के बजाय परिवहन व्यवस्था पहले तैयार करके उद्योगों को आकर्षित करना अधिक समझदारी होगी।
छत्रपति संभाजीनगर के सुधारित विकास प्रारूप में कुछ सड़कों की चौड़ाई पहले की तुलना में कम किए जाने पर भी पुनर्विचार की जरूरत है। आज के यातायात को आधार बनाकर सड़कें तैयार करना भविष्य के लिए पर्याप्त नहीं होगा। अगले 25 वर्षों में शहर किस दिशा में बढ़ेगा, शेंद्रा-बिडकीन में कितने उद्योग आएंगे, कितने लोगों को रोजगार मिलेगा और कितनी आबादी आसपास बसेगी, इसका अनुमान लगाकर सड़कों की योजना बनानी होगी।
आज जमीन उपलब्ध है, इसलिए पर्याप्त चौड़ाई के मार्ग, बाईपास और संपर्क सड़कें बनाना आसान है। लेकिन कुछ वर्षों बाद जब दोनों ओर निर्माण हो जाएगा, तब सड़क चौड़ी करना कठिन और बेहद महंगा होगा। इसलिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर अभी से निर्णय लेना जरूरी है।
छत्रपति संभाजीनगर के सामने इस समय औद्योगिक विकास का बड़ा अवसर है। शेंद्रा-बिडकीन और औरिक के विस्तार से मराठवाड़ा में रोजगार, व्यापार और निवेश को नई दिशा मिल सकती है। लेकिन निवेश आकर्षित करना विकास की पहली सीढ़ी है। असली चुनौती उस निवेश को लंबे समय तक टिकाए रखना है।
यदि उद्योगों को अच्छी सड़कें, निर्बाध परिवहन, पर्याप्त पानी, मजबूत जल निकासी, सार्वजनिक परिवहन और बेहतर नागरिक सुविधाएं मिलती हैं, तभी औद्योगिक क्षेत्र स्थायी रूप से विकसित हो सकेगा। अन्यथा उद्योग बढ़ेंगे, लेकिन उनके साथ यातायात जाम, प्रदूषण, दुर्घटनाएं, पानी की समस्या और अनियोजित बस्तियां भी बढ़ सकती हैं।
बता दें कि पुणे की चाकण MIDC में बुनियादी सुविधाओं को अभाव में 20 कंपनियों ने अपना ठिकाना बदलने का फैसला किया है। चाकण का अनुभव इसी खतरे की ओर संकेत करता है। छत्रपति संभाजीनगर को चाकण की स्थिति बनने का इंतजार नहीं करना चाहिए। आज से योजना बनाई गई तो कल शेंद्रा-बिडकीन देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल हो सकता है। लेकिन तैयारी नहीं हुई तो औद्योगिक विकास के साथ अव्यवस्था भी बढ़ेगी।
छत्रपति संभाजीनगर को केवल बड़ा शहर नहीं, बल्कि बेहतर जुड़ा हुआ, सुरक्षित, सुविधासंपन्न और रहने योग्य शहर बनाना होगा। उद्योगों की रफ्तार और नागरिक सुविधाओं का विकास साथ-साथ चले, यही आने वाले 25 वर्षों की सबसे बड़ी जरूरत है।