

Pune Chakan MIDC Industrial Exodus: महाराष्ट्र का प्रमुख ऑटोमोबाइल और औद्योगिक हब माना जाने वाला चाकण औद्योगिक क्षेत्र इन दिनों अपने अस्तित्व की सबसे गंभीर लड़ाई लड़ रहा है। खस्ताहाल सड़कें, लगातार बिजली कटौती, भीषण ट्रैफिक जाम और प्रदूषण के कारण चाकण एमआईडीसी की स्थिति किसी आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीज जैसी हो गई है। राज्य से उद्योग बाहर नहीं जा रहे हैं के सरकारी दावों की हवा निकालते हुए परेशान बीस कंपनियों के मालिकों और निदेशकों ने अब चाकण को अलविदा कहकर खंडाला एमआईडीसी में स्थानांतरित होने का ऐतिहासिक और कड़ा निर्णय लिया है।
बुधवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्योगपतियों ने प्रशासनिक विफलता और सरकार की बेरुखी पर अपना कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। इस अवसर पर कुणाल कड, दिलीप बटवाल, शंतनु कुलकर्णी, जयदेव अक्कलकोटे और धनंजय शेडबाले सहित भारी संख्या में कंपनियों के पदाधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कुणाल कड ने बताया कि चाकण क्षेत्र में लगभग 750 छोटी-बड़ी कंपनियां कार्यरत हैं, जिनसे सालाना करीब 32 हजार करोड़ रुपये का व्यापारिक टर्नओवर होता है। इसके बावजूद, बुनियादी ढांचे के पूरी तरह ध्वस्त होने के कारण 200 से अधिक कंपनियों को रोजाना भारी वित्तीय घाटा सहना पड़ रहा है। घंटों लंबे ट्रैफिक जाम में कर्मचारियों का समय बर्बाद हो रहा है, जिससे कच्चे और तैयार माल की आवाजाही पूरी तरह ठप पड़ जाती है।
चाकण छोड़ने के निर्णय के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। एमआईडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपेंद्र सिंह कुशवाह और पुणे के जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने तुरंत आपातकालीन ऑनलाइन बैठक बुलाई। बैठक में पीएमआरडीए के अभिजीत चौधरी, एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। प्रशासन ने स्वीकार किया कि जलभराव और गड्डों के कारण ट्रैफिक की समस्या बेहद विकराल हो गई है।
सीईओ कुशवाह और जिलाधिकारी डुडी ने सख्त हिदायत दी कि 31 अगस्त तक चाकण-तलेगांव की सभी राष्ट्रीय राजमार्ग व आंतरिक सड़कों की मरम्मत, पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था और ट्रैफिक में बाधा बनने वाले अनधिकृत अतिक्रमणों को युद्ध स्तर पर हटाया जाए। अधिकारियों ने कहा कि यातायात, सड़क, पार्किंग और अतिक्रमण की समस्याएं नागरिकों, कामगारों और वाहन चालकों की सुरक्षा से जुड़ी हैं, इसलिए सभी विभाग समन्वय से काम करते हुए 31 अगस्त तक उपाय पूरे करें प्रशासनिक बैठक पर निराशा जाहिर करते हुए कंपनी मालिकों ने साफ कर दिया है कि अब उद्योगपतियों को केवल आश्वासनों और बैठकों की नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस और स्थायी समाधान की आवश्यकता है।
चाकण इंडस्ट्रियल एसोसिएशन अध्यक्ष जयदेव अक्कलकोटे प्रशासनिक बैठकों के कोरे आश्वासनों से अब बात नहीं बनेगी; घरातल पर ठोस समाधान चाहिए, यदि बुनियादी स्थितियां नहीं सुधरी, तो चाकण से उद्योगों का पलायन तय है, जिससे राज्य की औद्योगिक साख को तगड़ा झटका लगेगा।