दिल्ली और गोवा में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान पहले से कार्यरत हैं।
केंद्रीय बजट में तीन नए आयुर्वेद संस्थानों की घोषणा की गई है।
तीसरे संस्थान के लिए विभिन्न राज्यों से 22 प्रस्ताव मिले हैं।
देशभर में कुल 10 अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने का लक्ष्य है।
Sambhajinagar Ayush Hospital Land Issue: छत्रपति संभाजीनगर में प्रस्तावित आयुष अस्पताल का निर्माण जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण अब तक शुरू नहीं हो सका है। इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य परियोजना को लेकर केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र सरकार को आवश्यक निर्देश दिए हैं।
केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार पहले अस्पताल के लिए उपयुक्त जमीन निश्चित करे और उसका प्रस्ताव केंद्र को भेजे। इसके बाद ही निर्माण की प्रक्रिया को गति मिल सकेगी।
एमजीएम विश्वविद्यालय के रुक्मिणी सभागार में विश्व फार्मासिस्ट दिवस और राष्ट्रीय फार्मेसी सप्ताह के अवसर पर राज्यस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव शामिल हुए। कार्यक्रम के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की और छत्रपति संभाजीनगर में प्रस्तावित आयुष अस्पताल की स्थिति सहित केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र की प्राथमिकताओं पर जानकारी दी।
पत्रकारों ने उनसे अस्पताल के निर्माण में हो रही देरी और देश में नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने की योजना को लेकर सवाल पूछे। शहर में प्रस्तावित आयुष अस्पताल की वर्तमान स्थिति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जमीन का मामला अभी तक हल नहीं हुआ है। राज्य सरकार की ओर से जमीन उपलब्ध कराने के बाद ही आगे की कार्रवाई संभव होगी।
इस बीच, देश में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की संख्या बढ़ाने की योजना पर भी उन्होंने जानकारी दी। दिल्ली और गोवा में ऐसे संस्थान कार्यरत हैं। इस वर्ष के केंद्रीय बजट में तीन नए संस्थानों की घोषणा की गई है। तीसरे संस्थान के लिए विभिन्न राज्यों से 22 प्रस्ताव मिले हैं। महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों की प्रस्तुतियां पूरी हो चुकी हैं। अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लेंगे। देशभर में कुल दस ऐसे संस्थान स्थापित करने का लक्ष्य है।
जाधव ने कहा कि मानसिक तनाव, हृदय रोग, मोटापा और कैंसर जैसे जीवनशैली से जुड़े रोगों की रोकथाम के लिए संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और जनजागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पारंपरिक आयुष चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक शोध, औषधियों की गुणवत्ता और वैज्ञानिक परीक्षणों से जोड़ना भी केंद्र सरकार की प्राथमिकता है।