पीएम मोदी, मोहन भागवत और प्रकाश आंबेडकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
छत्रपति संभाजीनगर

RSS-ISI सीक्रेट मीटिंग! आंबेडकर ने PM मोदी और भागवत से पूछे सवाल, कोलंबो बैठक के 4 मुद्दों के खुलासे की मांग

RSS ISI Secret Meeting: प्रकाश आंबेडकर ने कोलंबो में राम माधव और पूर्व ISI प्रमुख की कथित गुप्त बैठक को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने PM मोदी और मोहन भागवत से खुलासे की मांग की।

शफीउल्ला हुसैनी, गोरक्ष पोफली

Prakash Ambedkar Demands PM Modi RSS Chief Clarifications: वंचित बहुजन आघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस)और पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई के बीच कथित गुप्त बातचीत को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

प्रकाश आंबेडकर ने शुक्रवार को दावा किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख प्रवक्ता राम माधव की श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई के पूर्व प्रमुख पतौड़ी तथा अन्य लोगों के साथ तीन दिन तक गुप्त चर्चा हुई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत से इस कथित बातचीत के चारों मुद्दों का खुलासा करने की मांग की।

राम माधव की बातचीत का क्या निष्कर्ष निकला?

मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ में सोमनाथ सूर्यवंशी प्रकरण की सुनवाई के लिए पहुंचे आंबेडकर ने पत्रकारों से बातचीत में यह आरोप लगाए। उन्होंने सवाल उठाया कि पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी के प्रतिनिधियों के साथ विदेश नीति से जुड़े विषयों पर बातचीत करने के लिए राम माधव को केंद्र सरकार ने अधिकृत किया था या नहीं।

यदि ऐसी कोई अनुमति दी गई थी, तो उसके पीछे क्या उद्देश्य था और बातचीत से क्या निष्कर्ष निकला, यह भी देश को बताया जाना चाहिए।

‘चार मुद्दों पर हुई बातचीत, देश को बताएं क्या चर्चा हुई’

आंबेडकर ने दावा किया कि राम माधव, आईएसआई के पूर्व प्रमुख और अन्य लोगों के बीच चार महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत हुई। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत से इन चारों मुद्दों को सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी पूरे मामले पर देश के सामने स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर यदि किसी स्तर पर बातचीत की गई है तो उसे छिपाने के बजाय सार्वजनिक किया जाना चाहिए। बातचीत का उद्देश्य क्या था, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और उससे क्या निष्कर्ष निकला, इसकी जानकारी जनता को मिलनी चाहिए।

‘पाकिस्तान पर कठोर रुख, फिर गुप्त बातचीत क्यों?’

आंबेडकर ने भाजपा की पाकिस्तान नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ओर भाजपा पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्तर पर पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी के पूर्व अधिकारियों से बातचीत की गई है तो इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

उन्होंने सवाल किया कि यदि पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने के लिए बातचीत की गई थी तो इसे खुले तौर पर क्यों नहीं किया गया। विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर देश की जनता को जानकारी देने की जिम्मेदारी सरकार की है।

‘आरएसएस और पाकिस्तान को ब्रिटिशों ने जन्म दिया’

आंबेडकर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और पाकिस्तान को लेकर भी तीखी राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और पाकिस्तान दोनों ‘जुड़वां बहनें’ हैं और दोनों को अंग्रेजों ने जन्म दिया। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर प्रमुख विपक्षी दलों को आवाज उठानी चाहिए थी। लेकिन यह मुद्दा भी वंचित बहुजन आघाड़ी को ही उठाना पड़ रहा है। उन्होंने विपक्षी दलों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए।

धार्मिक मुद्दों से आगे बढ़कर सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर चर्चा जरूरी

आंबेडकर ने कहा कि देश में जनता को धार्मिक स्थलों के मुद्दों में उलझाया जा रहा है। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च और बौद्ध विहार लोगों को मानसिक शांति दे सकते हैं, लेकिन देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और विदेश नीति से जुड़े प्रश्नों का समाधान नहीं कर सकते।

उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि धार्मिक मुद्दों के बजाय राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और विदेश नीति जैसे मूल प्रश्नों पर गंभीर चर्चा की जाए। देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति से जुड़े सवालों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की जरूरत है।

भाजपा के सत्ता में आने के बाद विदेश नीति में ‘गलतियां’: आंबेडकर

आंबेडकर ने भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारों की विदेश नीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद विदेश नीति के स्तर पर कई बड़ी गलतियां हुई हैं।

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को आगरा में बातचीत के लिए बुलाया गया था। प्रकाश आंबेडकर का दावा है कि उस समय पाकिस्तान आर्थिक संकट से गुजर रहा था और भारत की ओर से बातचीत का निमंत्रण मिलने से उस पर बना दबाव कम हुआ। इसके बाद कारगिल संघर्ष की घटना सामने आई।

आंबेडकर ने आरोप लगाया कि भाजपा जब राजनीतिक रूप से मुश्किल में होती है, तब पाकिस्तान और उसकी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई का मुद्दा सामने आ जाता है।

कांग्रेस पर भी बरसे, बोले- कार्यालयों को ताले लगा देने चाहिए

कथित आरएसएस-आईएसआई बातचीत के मुद्दे पर कांग्रेस की चुप्पी को लेकर भी आंबेडकर ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इतना गंभीर मुद्दा सामने आने के बावजूद कांग्रेस की ओर से अपेक्षित तरीके से आवाज नहीं उठाई जा रही है।

उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष का जातीय द्वेष के कारण अपमान किए जाने के बावजूद पार्टी प्रभावी आंदोलन नहीं कर रही है। आंबेडकर ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि कांग्रेस इसी तरह निष्क्रिय रहने वाली है तो उसे अपने कार्यालयों पर ताले लगा देने चाहिए।

प्रधानमंत्री और मोहन भागवत से सीधे सवाल

आंबेडकर ने पूरे मामले में दो सीधे सवाल उठाए। पहला, राम माधव को पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी के प्रतिनिधियों से बातचीत करने का अधिकार किसने दिया? दूसरा, यदि ऐसी कोई बातचीत हुई है तो उसमें किन चार मुद्दों पर चर्चा हुई और उसका परिणाम क्या निकला?

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत से इन सवालों का स्पष्ट जवाब देने की मांग की। आंबेडकर ने कहा कि मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यदि विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषय पर कोई बातचीत हुई है तो उसकी सच्चाई देश के सामने आनी चाहिए।

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