Chhatrapati Sambhajinagar NCERT Workshop: उर्दू शिक्षकों के लिए तैयार की जा रही पुस्तिका को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप अधिक समावेशी और बाल-केंद्रित बनाया जाना चाहिए, ताकि यह शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए भी प्रभावी शिक्षण का माध्यम बन सके।
यह बात राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी), नई दिल्ली की प्रा. चमन आरा ने कही। वे सोमवार को मराठवाड़ा कॉलेज ऑफ एजुकेशन में शुरू हुई पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर बोल रही थीं।
एनसीईआरटी के प्राथमिक शिक्षा विभाग के सहयोग से आयोजित कार्यशाला का विषय ‘उर्दू शिक्षकों की पुस्तिका का पुनरीक्षण और अंतिम स्वरूप निर्धारण’ है। कार्यशाला में देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिक्षा विशेषज्ञ पुस्तिका की विषयवस्तु की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन करेंगे और इसे अंतिम रूप देंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रा. शेख इमरान रमजान ने की। इस अवसर पर गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की समन्वयक प्रा. कनीज फातिमा और वरिष्ठ प्राध्यापक प्रा. मिर्जा महफूज बेग उपस्थित थे। डॉ. शेख काशेफा अंजुम कार्यशाला की स्थानीय समन्वयक हैं।
कार्यशाला में श्रीनगर, चेन्नई, हरियाणा, छत्रपति संभाजीनगर सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हुए हैं। इनमें डॉ. शाह फैसल, डॉ. तैयब अली, डॉ. अब्दुल अजीज, प्रा. काजी नवीन, डॉ. खान शहनाज बानो, डॉ. शाहीन परवीन, सरताज शाकेर और इलियास अहमद प्रमुख हैं।
पांच दिनों के दौरान विशेषज्ञ शिक्षण पद्धति, पाठ योजना, अध्ययन निष्पत्ति, मूल्यांकन तथा समावेशी शिक्षा से जुड़े विषयों पर पुस्तिका की समीक्षा करेंगे। इसका उद्देश्य उर्दू शिक्षकों को कक्षा शिक्षण के लिए अधिक उपयोगी और व्यवहारिक सामग्री उपलब्ध कराना है।
प्रा. चमन आरा ने पुस्तिका को विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के साथ शिक्षण सामग्री में भी आवश्यक सुधार होना चाहिए।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रा. शेख इमरान रमजान ने विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए उर्दू शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए एनसीईआरटी के साथ इस सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उद्घाटन कार्यक्रम में शिक्षक-प्रशिक्षक, शोधकर्ता, उर्दू शिक्षक और बी. एड. के विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में डॉ. सोहेल जकीउद्दीन ने आभार व्यक्त किया।