दीक्षांत समारोह के दौरान (सोर्स: नवभारत)
छत्रपति संभाजीनगर

स्वयं ज्ञान का प्रकाश बनें... MGM दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों से प्रो. उन्नत पंडित का आह्वान

MGM University Convocation: एमजीएम विश्वविद्यालय के 5वें दीक्षांत समारोह में प्रो. डॉ. उन्नत पंडित ने विद्यार्थियों से स्वयं ज्ञान का प्रकाश बनने का आह्वान किया।

शफीउल्ला हुसैनी, गोरक्ष पोफली

MGM University Gold Medalists: उपाधि केवल प्रमाणपत्र नहीं, समाज के प्रति जिम्मेदारी का संकल्प है। अपने ज्ञान को आचरण में उतारकर समाज की समस्याओं के समाधान और देश की उन्नति में योगदान दें। भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के पेटेंट, डिजाइन एवं व्यापार चिह्न महानियंत्रक प्रो. डॉ. उन्नत पंडित ने शनिवार को महात्मा गांधी मिशन विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों से यह आह्वान किया।

एमजीएम खेल मैदान में आयोजित समारोह में 1,991 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि शिक्षा एवं विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मविभूषण डॉ। रघुनाथ माशेलकर को मानद डीएससी और वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. डॉ. आ. ह. सालुंखे को मानद डी. लिट. उपाधि से सम्मानित किया गया।

स्वयं ज्ञान का प्रकाश बनें

प्रो. डॉ. उन्नत पंडित ने कहा कि उपाधि प्राप्त करना विद्यार्थियों के लिए उत्सव का अवसर है। अब वे जीवन के नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं। विश्वविद्यालय का ब्रीदवाक्य ‘अप्पो दीपो भव’ विद्यार्थियों को स्वयं ज्ञान का प्रकाश बनने की प्रेरणा देता है। शिक्षा और ज्ञान को केवल उपाधि तक सीमित न रखते हुए उसे व्यवहार में उतारना चाहिए। विद्यार्थियों को अपने ज्ञान का उपयोग समाज की कठिनाइयों को दूर करने और उसकी उन्नति के लिए करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सकारात्मक सोच, दृढ़ता, अनुशासन और अहिंसा जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाकर विद्यार्थियों को समाज और राष्ट्र के लिए कार्य करना चाहिए। नई बौद्धिक संपदा और ज्ञान का सृजन करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।

अवसर मिले तो उसका सार्थक उपयोग करें

मानद डी.लिट. उपाधि से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. डॉ. आ. ह. सालुंखे ने कहा कि अवसर और अधिक प्रयास मिलकर गुणवत्ता का निर्माण करते हैं। माता-पिता, शिक्षक और समाज को प्रत्येक व्यक्ति को अपनी प्रतिभा विकसित करने का अवसर देना चाहिए। अवसर मिलने के बाद व्यक्ति को कठिन परिश्रम से उसका सार्थक उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति की सफलता के पीछे अनेक पीढ़ियों का योगदान होता है। इसलिए सफलता मिलने के बाद पीछे मुड़कर उन लोगों को आगे बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए, जो आज भी अज्ञान और अभाव में जीवन जी रहे हैं। स्वयं को विकसित करने के साथ दूसरों को आगे बढ़ाने का प्रयास ही मानव जीवन को सार्थक बनाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में जिज्ञासा और जागरूकता बनाए रखने का आह्वान भी किया।

माशेलकर ने दिए सफलता के पांच मंत्र

पद्मविभूषण डॉ. रघुनाथ माशेलकर ने मानद डीएससी उपाधि स्वीकार करते हुए कहा कि वे इस सम्मान को अपनी मां को समर्पित करते हैं। उन्होंने अपने संघर्षपूर्ण विद्यार्थी जीवन को याद करते हुए बताया कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त की और 12 वर्ष की आयु तक नंगे पैर विद्यालय जाते थे।

उन्होंने विद्यार्थियों को पांच संदेश दिए। अपनी आकांक्षाएं ऊंची रखें, लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें, उद्देश्य के प्रति दृढ़ता और उत्साह बनाए रखें, अवसर की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं अवसर पैदा करें और अपने प्रयासों की कोई सीमा निर्धारित न करें। उन्होंने कहा कि मानवीय क्षमताओं की कोई सीमा नहीं है।

दीक्षांत समारोह के दौरान छात्रा

नई शिक्षा नीति के बाद पहली स्नातक पीढ़ी

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. विलास सपकाल ने कहा कि विश्वविद्यालय के पुस्तकदान अभियान के माध्यम से अब तक 21 हजार पुस्तकें प्राप्त हुई हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और अवसरों का विस्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद यह विश्वविद्यालय की पहली स्नातक पीढ़ी है।

कुलाधिपति अंकुशराव कदम ने विद्यार्थियों से सत्य, अनुशासन, बौद्धिक जिज्ञासा और सामाजिक उत्तरदायित्व को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में निहित स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता, समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों को मजबूत करते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।

1,991 विद्यार्थियों को उपाधियां, 14 को स्वर्ण पदक

दीक्षांत समारोह में सात संकायों के कुल 1,991 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 48 शोध उपाधि, 430 स्नातकोत्तर, 1,392 स्नातक, 34 स्नातकोत्तर डिप्लोमा, 76 डिप्लोमा और 11 प्रमाणपत्र शामिल हैं।

इस अवसर पर विभिन्न श्रेणियों में 14 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। समारोह में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अंकुशराव कदम, कुलपति प्रो. डॉ. विलास सपकाल, कुलसचिव डॉ. आशीष गाडेकर, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, शिक्षक, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कुलपति ने विश्वविद्यालय की प्रगति का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जबकि कुलाधिपति ने अध्यक्षीय संबोधन किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।

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