Sambhajinagar Chandrashekhar Bawankule Land Scam SIT Revenue : छत्रपति संभाजीनगर जिले में खिदमत-मास, इनाम, मदद-मास और वर्ग-2 जमीनों को वर्ग-1 में बदलने से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच के लिए राज्य सरकार एक माह में एसआईटी गठित करेगी। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने नागपुर की तर्ज पर जांच की घोषणा की है।
छत्रपति संभाजीनगर जिले में जमीनों के वर्गीकरण और हस्तांतरण से जुड़े मामलों में कथित गड़बड़ियों की शिकायतों को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने नागपुर की तर्ज पर छत्रपति संभाजीनगर में जमीन घोटालों की जांच के लिए एक माह के भीतर विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की घोषणा की है।
मंत्री के अनुसार, नागरिकों की ओर से इस संबंध में सैकड़ों शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें खिदमत-मास, इनाम, मदद-मास, बहन तथा वर्ग-2 जमीनों को वर्ग-1 में परिवर्तित करने से संबंधित मामले शामिल हैं।
बावनकुले ने बताया कि शिकायतकर्ताओं को टोकन नंबर दिए गए हैं। नियमों के तहत जिन मामलों का निपटारा संभव है, उन्हें जिलाधिकारी के माध्यम से हल किया जाएगा। वहीं, जिन मामलों में फर्जी रजिस्ट्री, फेरफार या जमीन बेचकर धोखाधड़ी किए जाने की शिकायतें हैं, उनकी जांच एसआईटी करेगी।
एसआईटी(SIT) में जिलाधिकारी, विभागीय आयुक्त और पुलिस आयुक्त शामिल रहेंगे। जांच में यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार मामला दर्ज किया जाएगा। मंत्री ने जमीन धोखाधड़ी से प्रभावित नागरिकों से अपनी शिकायतें एसआईटी के समक्ष प्रस्तुत करने की अपील भी की।
राजस्व मंत्री ने कहा कि खिदमत-मास जमीन से जुड़े मामलों के लिए अलग कानून बनाने की आवश्यकता है। मदद-मास और खिदमत-मास जमीनों से संबंधित मामलों को लेकर विधानमंडल में कानून लाने की जरूरत बताई गई है। वहीं, इनाम जमीनों के संबंध में दिसंबर में कानून लाने की जानकारी भी उन्होंने दी।
खिदमत-मास जमीन के मामलों में निर्धारित 25 प्रतिशत राशि के बजाय 5 प्रतिशत राशि मांगने की शिकायतें सामने आने की बात भी कही गई है। इसी तरह वर्ग-2 की जमीन को नियमों के विपरीत वर्ग-1 में परिवर्तित किए जाने से रोकने के लिए कानूनी प्रावधान मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई।
चंद्रशेखर बावनकुले के अनुसार, राजस्व प्रशासन में अधिकारियों के अधिकारों का उचित वर्गीकरण किया गया है। जमीन के शर्तभंग से जुड़े मामलों में 10 लाख रुपए तक के मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार जिलाधिकारियों को दिया गया है। इसी तरह वर्ग-2 की जमीन को वर्ग-1 में परिवर्तित करने के मामलों में एक करोड़ रुपए तक के अधिकार जिलाधिकारियों को दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि अब तक राजस्व कानून में 103 संशोधन किए जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि जमीन से जुड़े मामलों में नियमों का पालन सुनिश्चित करने और कथित धोखाधड़ी की शिकायतों की जांच के लिए आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।