छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)
छत्रपति संभाजीनगर

गुंठेवारी धारकों को शुल्क में छूट, फिर भी दंड का दोहरा बोझ; नियमितीकरण से पीछे हट रहे संभाजीनगर के नागरिक

Gunthewari Fee Penalty Relief: संभाजीनगर में गुंठेवारी संपत्तियों के नियमितीकरण के लिए विशेष छूट योजना के बावजूद आवेदन नहीं बढ़े। शुल्क में राहत के बाद भी दंड और अन्य शुल्क लोगों पर भारी पड़ रहे हैं।

शफीउल्ला हुसैनी, आलोक उमाकृष्ण

Sambhajinagar Gunthewari Regularization Fee Penalty: गुंठेवारी संपत्तियों को नियमित कराने के लिए छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका ने राहत का रास्ता खोला, लेकिन शुल्क का गणित अब भी नागरिकों के लिए भारी पड़ रहा है।

विशेष छूट योजना लागू हुए एक महीना बीतने के बावजूद नियमितीकरण के लिए नागरिकों की अपेक्षित संख्या में संचिकाएं नहीं पहुंचीं। निर्माण शुल्क में बड़ी राहत मिलने के बाद भी सहायक क्षेत्र और भवन की निर्धारित खुली जगह पर शुल्क के साथ दंड लगाए जाने से कुल खर्च कम नहीं हो रहा है।

लागू होगा विशेष छूट योजना

नतीजतन, राहत योजना का लाभ लेने के बजाय कई गुंठेवारी धारक फिलहाल इंतजार करने की नीति अपना रहे हैं। महायुति सरकार के सत्ता में आने के बाद गुंठेवारी धारकों को नियमितीकरण में राहत देने की घोषणा की गई थी। इसके बाद महापौर समीर राजूरकर के निर्देश पर आयुक्त अमोल येडगे ने विशेष छूट योजना लागू करने संबंधी परिपत्र जारी किया।

योजना के तहत भवन निर्माण पर लगने वाला सुधार शुल्क पूरी तरह माफ किया गया है, जबकि खुले भूखंड के लिए इसमें 50 प्रतिशत की छूट दी गई है। हालांकि, नियमितीकरण के लिए लगने वाले अन्य शुल्क और दंड यथावत रखे गए हैं।

दो मदों में 20-20 प्रतिशत का बोझ

सहायक क्षेत्र पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के बाद उसी राशि पर 10 प्रतिशत दंड वसूला जा रहा है। इसी तरह भवन की निर्धारित खुली जगह पर भी 10 प्रतिशत शुल्क और 10 प्रतिशत दंड लिया जा रहा है। इस तरह दोनों मदों में अलग-अलग 20 प्रतिशत तक का भार पड़ता है। बड़े भूखंडों के मामलों में यह राशि काफी अधिक हो जाती है। नागरिकों का कहना है कि ऐसी स्थिति में निर्माण शुल्क की माफी का वास्तविक लाभ सीमित रह जाता है।

राहत और भुगतान के बीच फंसे नागरिक

छत्रपति संभाजीनगर मनपा की ओर से योजना को नागरिकों के लिए बड़ी राहत के रूप में पेश किया गया था। लेकिन नागरिकों के अनुसार नियमितीकरण की अंतिम गणना सामने आने पर उन्हें अब भी बड़ी रकम चुकानी पड़ रही है। खासकर बड़े भूखंडों के मालिकों के लिए अतिरिक्त शुल्क और दंड बड़ी बाधा बन रहे हैं। इसी कारण योजना का लाभ लेने के इच्छुक नागरिक भी आगे बढ़ने से पहले खर्च का आकलन कर रहे हैं।

महीनेभर में नहीं बढ़ी नियमितीकरण की रफ्तार

विशेष छूट लागू हुए लगभग एक माह हो गया है। इसके बावजूद नियमितीकरण के लिए अपेक्षित संख्या में आवेदन नहीं आने से योजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि वास्तव में गुंठेवारी संपत्तियों को नियमित करना है तो शुल्क ढांचे में व्यापक राहत देनी होगी। केवल एक शुल्क में छूट देने से समस्या का समाधान नहीं होगा।

दंड घटाने की मांग तेज

गुंठेवारी धारकों की मांग है कि सहायक क्षेत्र और भवन की निर्धारित खुली जगह पर लगने वाले दंड को कम किया जाए या पूरी तरह समाप्त किया जाए। उनका तर्क है कि दंड में राहत मिलने पर बड़ी संख्या में लोग नियमितीकरण के लिए आगे आएंगे और वर्षों से लंबित मामलों का निपटारा भी तेजी से हो सकेगा।

मनपा की आय बढ़ाने पर सवाल

नई संपत्तियों पर करीब 59 प्रतिशत कर, बिना जलापूर्ति योजना वाले क्षेत्रों में नल कनेक्शन के लिए छह हजार रुपये शुल्क और गुंठेवारी नियमितीकरण में दंड की व्यवस्था को लेकर नागरिकों में नाराजगी है। उनका आरोप है कि एक ओर राहत की घोषणा की जा रही है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न शुल्कों के माध्यम से मनपा की आय बढ़ाने पर अधिक जोर दिया जा रहा है।

अब अगली नजर दंड में राहत पर गुंठेवारी नियमितीकरण को गति देने के लिए नागरिकों की नजर अब मनपा के अगले निर्णय पर है। यदि सहायक क्षेत्र और निर्धारित खुली जगह पर लगने वाले दंड में कमी की जाती है तो आवेदन बढ़ने की संभावना है। फिलहाल शुल्क और दंड का दोहरा बोझ ही योजना की सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है।

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