आपदाओं से जूझ रहा किसान (सोर्स: सोशल मीडिया)
छत्रपति संभाजीनगर

छत्रपति संभाजीनगर में जनवरी-अगस्त के बीच 138 आत्महत्या के मामले, 75 पात्र और 56 लंबित; रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Chhatrapati Sambhajinagar Farmer Suicides: छत्रपति संभाजीनगर में जनवरी से अगस्त तक किसान आत्महत्या के 138 मामले दर्ज हुए। 75 प्रकरण पात्र पाए गए, जबकि 56 मामले जांच या निर्णय के लिए लंबित हैं।

आलोक उमाकृष्ण

January August 138 Cases In Sambhajinagar: अलग-अलग आपदाओं से जूझ रहे किसानों को राहत प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने भले ही कर्जमाफी का ऐलान किया हो, मगर उनकी खुदकुशी थमने का नाम नहीं ले रही है। गत 8 महीनों में जनवरी से अगस्त के बीच जिले में 138 अन्नदाताओं ने मौत को गले लगाया है।

किसानों की खुदकुशी के बाद उनके रिश्तेदारों ने प्रशासन के पास सहायता के लिए प्रस्ताव दाखिल करने के बाद 75 प्रकरण पात्र पाए गए हैं, जबकि 7 मामले अपात्र। वहीं 56 प्रकरण जांच या निर्णय के लिए लंबित हैं। अब तक 29 प्रकरणों में सहायता राशि का लाभ दिया गया है।

जिलास्तरीय रिपोर्ट के अनुसार जनवरी में 20, फरवरी में 18, मार्च में 15 और अप्रैल में 18, यानी पहले चार महीनों में कुल 71 मामले दर्ज किए गए हैं। मई में 17, जून में 21, जुलाई में 10 व अगस्त में 19 प्रकरण सामने आए हैं। इस तरह मई से अगस्त के बीच 67 मामले दर्ज हुए हैं।जनवरी से अगस्त तक कुल संख्या 138 के पार पहुंच गई है।

रिपोर्ट के अनुसार

रिपोर्ट में नांदेड़ जिले की जनवरी से अप्रैल तक की जानकारी अंकित है। इन 4 महीनों में क्रमशः 11, 8, 10 व 4, कुल 33 प्रकरण दर्ज अंकित हैं। छत्रपति संभाजीनगर जिले के मई-अगस्त में 17, 21, 10 व 19 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। जनवरी-अप्रैल के 71 मामलों को मिलाकर जिले का 8 माह का कुल आंकड़ा 138 पहुंच गया है।

इन कारणों से दोहरी मार

सूखे व खेती की बढ़ती लागत के चलते किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। कभी अतिवृष्टि, तो कभी कृषि उपज को कम भाव मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। इस वर्ष गत 3 माह से बारिश ने मुंह मोड़ने से खेतों में खड़ी फसलें सूख गए हैं। रबी की संभावित उपज भी हाथ से जाने का खतरा है।

बीड़ में सबसे अधिक मामले

रिपोर्ट की मानें तो पूरा मराठवाड़ा विभाग किसानों की खुदकुशी का दंश झेल रहा है। वहीं बीड जिले में सबसे अधिक 149 मामले प्रकरण किए गए है। इनमें 79 पात्र, 16 अपात्र व 54 मामले जांच अथवा निर्णय के लिए लंबित हैं। 50 मामलों में सहायता का लाभ दिया गया है।

धाराशिव में 88, जालना में 61, लातूर में 46, परभणी में 45 व हिंगोली में 44 अन्नदाताओं के प्रकरण दर्ज किए गए हैं। धाराशिव में 60 मामले पात्र, 1 अपात्र व 27 प्रकरण लंबित हैं।

जालना में 30 पात्र, 7 अपात्र व 24 प्रकरण लंबित हैं। लातूर जिले में 28 पात्र, 6 अपात्र व 12 प्रकरण लंबित है। परभणी में 15 पात्र, 5 अपात्र व 25 मामले लंबित है। हिंगोली में 24 पात्र, 14 अपात्र और 6 प्रकरण लंबित बताए गए हैं।

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