

वर्धा. जिले में किसान आत्महत्या का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है़ आये दिन तंगहाली में जीवनयापन कर रहे किसान मौत को गले लगा रहे हैं. इस वर्ष जनवरी से मई इन पांच माह में जिले के करीब 64 किसानों ने अपनी जीवनलीला खत्म कर ली है़ इसमें केवल 13 प्रकरण लाभ के पात्र ठहराये गए. वहीं 14 अपात्र बताये गए़ जबकि 37 आत्महत्या के मामलों में पुन: जांच शुरू है.
बता दें कि, वर्धा किसान आत्महत्याग्रस्त जिले में आता है़ गत पांच वर्षों से जिले में किसान आत्महत्या के मामले बढ़ रहे है़ं गत कुछ वर्षों से जिले का किसान प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है़ सुलतानी व आसमानी संकट से किसान आर्थिक संकट में घिर गया़ गत वर्ष भी प्राकृतिक आपदा के कारण जिले में हजारों हेक्टेयर की फसल बर्बाद हो गई़ इसमें कपास, सोयाबीन, फल बगीचा, सब्जी फसलों का काफी नुकसान हुआ था.
नुकसान क्षेत्र का सर्वे कर राहत निधि के लिए प्रस्ताव सरकार की ओर भेजा गया़ परंतु अब तक पीड़ित किसानों को भरपाई की राशि नहीं मिल पायी है़ ऐसी अनेक समस्याओं से जिले का किसान ग्रस्त है़ बैंकों द्वारा आसानी से कर्ज उपलब्ध नहीं हो पाता़ साहूकार किसानों की मजबूरी का लाभ उठाते है़.
आर्थिक अड़चन में परिवार का पालन पोषण, बच्चों की पढ़ाई का खर्च, बेटियों के विवाह का प्रश्न किसानों के समक्ष खडा रहता है़ इन सभी बातों से चिंतित होकर किसान आत्महत्या जैसा गंभीर कदम उठाता है़ किसानों की आत्महत्या को रोकने के लिए सरकार व प्रशासन ने अनेक उपक्रम चलाये है़ं परंतु इसका खासा असर नहीं होता दिखाई नहीं दे रहा़ जिले में जनवरी से मई माह तक करीब 64 किसान आत्महत्या के प्रकरण सामने आये है़.
जिले में पिछले पांच वर्षों में करीब 657 किसान आत्महत्या के प्रकरण सामने आये है़ं इनमें से 317 प्रकरण पात्र ठहराये गए़ 335 अपात्र व 5 प्रलंबित बताये गए़ वर्ष 2017 में 110, 2018 में 111, 2019 में 120, वर्ष 2020 में 152 व 2021 में 164 प्रकरण दर्ज किये गए़ लाभ के लिए पात्र प्रकरणों में 314 लाख की राहत दी गई है.
माह प्रकरण पात्र अपात्र प्रलंबित
जनवरी 15 04 07 04
फरवरी 12 05 04 03
मार्च 18 02 00 11
अप्रैल 13 02 00 11
मई 06 00 00 06
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कुल : 64 13 14 37