

Bank Employees Strike On Sunday Banking Protest: बैंक कर्मचारियों के लिए पांच दिन का सप्ताह लागू करने, पीएलआई से जुड़े भेदभावपूर्ण निर्णय वापस लेने और रविवार को बैंक चालू रखने के फैसले के विरोध में गुरुवार को छत्रपति संभाजीनगर में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की ओर से जोरदार प्रदर्शन किया गया।
जालना रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया के सामने बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में 500 से अधिक कर्मचारी और अधिकारी शामिल हुए। कर्मचारियों ने विरोध का संदेश देने के लिए काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू करने, पीएलआई से जुड़े कथित भेदभावपूर्ण निर्णय को वापस लेने तथा रविवार को बैंक चालू रखने के फैसले का विरोध किया।
कर्मचारियों का कहना था कि लगातार बढ़ते काम के दबाव और कर्मचारियों की कमी के कारण कार्यभार बढ़ रहा है। प्रदर्शन के दौरान बैंक यूनियनों के पदाधिकारियों ने कर्मचारियों की मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन के दौरान महाराष्ट्र स्टेट फेडरेशन के कैलास कानडे, एनसीबीई के ललित निकुंभ व मारुति निकम, एआईबीओसी के गणेश तायडे तथा अमोल गायके ने कर्मचारियों को संबोधित किया। संगठन पदाधिकारियों ने बैंक कर्मचारियों के लिए पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू करने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों के साथ रिजर्व बैंक, नाबार्ड तथा एलआईसी में पांच दिन का सप्ताह पहले से लागू है। इसके बावजूद बैंक कर्मचारियों को अब तक इस व्यवस्था का लाभ नहीं मिल पाया है।
पदाधिकारियों ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों की कमी और लगातार बढ़ते काम के दबाव के कारण कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार पड़ रहा है। उन्होंने जल्द पांच दिन का सप्ताह लागू करने की मांग की।
बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों की कमी के कारण मौजूदा कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त बोझ बढ़ता जा रहा है। छत्रपति संभाजीनगर में प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि लगातार बढ़ते कार्यभार के बीच कर्मचारियों को निर्धारित समय से अधिक काम करना पड़ रहा है। इससे उनके कामकाज और व्यक्तिगत जीवन पर भी असर पड़ रहा है।
यूनियनों ने कहा कि पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति और पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू होने से काम का दबाव कम किया जा सकता है। उन्होंने कर्मचारियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इस दिशा में जल्द निर्णय लेने की मांग की।